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एक खरब रुपयां से भी अधिक ठगी !

 

काठमांडू, २० अप्रिल । सार्वजनिक यातायात संचालन करनेवाले व्यवसायी की ओर से साल में राज्य को १ अरब रुपयां से भी अधिक नुक्सान हो जाता है । यातायात व्यवस्था समिति में गैर नाफामुलुक संस्था के नाम में दर्ता होकर संचालित सार्वजनिक यातायात अगर कानुन अनुसार सरकार को कर देते हैं तो वह साल में १ अरब से भी अधिक हो जाता है । इसके अलवा भी उपभोक्ता की ओर से थप १ खरब ठगी किया जाता है । यह समाचार आज प्रकाशित अन्नपूर्ण पोष्ट में है ।
संस्था ऐन २०३४ के अनुसार गैर नाफामुलक संस्था के रुप में पंजीकृत यातायात समिति राष्ट्रीय महासंघ में आवद्ध है, संघ में आवद्ध किसी भी समिति की ओर से आज तक सरकार को कर दाखिला नहीं हुआ है । उक्त नियमअनुसार दर्ज संघ–संस्था के लिए वार्षिक आमदानी तथा खर्च के लिए ‘अडिट’ भी नहीं करना पड़ता है, जिसके चलते वार्षिक १ अरब से ज्यादा रकम कर की दायरा से बाहर है । यातायात व्यवस्था विभाग के अनुसार सिर्फ कास्की जिला में पंजीकृत हो कर संचातिल सार्वजनिक सवारी साधनों की ओर से संकलित भाडा और उससे संकलित होनेवाला कर ११ करोड से अधिक है ।

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