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जनकपुरबासी से मैं क्षमाप्रार्थी हूंः प्रधानमन्त्री मोदी

 

जनकपुरधाम, ११ मई । भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी ने जनकपुरबासी से क्षमा मांग लिए हैं । जनकपुर में आयोजित अभिनन्दन समारोह को सम्बोधन करते हुए उन्होंने कहा– ‘अगष्ट १४ में मैं पहली बार नेपाल आए थे । उस समय संविधानसभा में मैंने कहा था कि मैं जनकपुर आ रहा हूं । लेकिन आने के लिए देर हो गया, इसके लिए मैं क्षमा मांगता हूं । भद्रकाली एकादशी के दिन मुझें सीमाता ने दर्शन दी हैं ।’ प्रधानमन्त्री मोदी का कहना था कि उनकी जनकपुर आने की इच्छा पहले से ही थी ।

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प्रधानमन्त्री ओली ने कहा कि जनकपुर आकर उनकी मनोकामना पूरी हुई है और जीवन धन्य हो गया है । उनका मानना है कि इसबार की नेपाल भ्रमण एक तीर्थयात्री के रुप में रहेगा । प्रधानमन्त्री मोदी का कहना है कि राजा जनक ने सिर्फ जनकपुर और अयोध्या को नहीं नेपाल और भारत को बन्धन में रखे हैं । उन्होंने कहा– ‘यह तो राम–सीता की बन्धन है । रामेश्वर से लेकर पशुपति और लुम्बिनी तक बोधगया बन्धन है ।’ प्रधानमन्त्री मोदी ने कहा कि यही बन्धन ही उन को जनकपुर तक ले आया है ।
प्रधानमन्त्री मोदी ने कहा कि नेपाल और भारत हर सुःख और दुख, आकांक्षा, सपना और संकल्प, मन और मन्दिर में एक ही है । उन्होंने आगे कहा– ‘नेपाल के बिना भारत की आस्था अधुरा रह जाएगी । नेपाल बिना भारत की इतिहास अधुरा रह जाएगा ।’ प्रधानमन्त्री का मानना है कि हर संकट के समय में नेपाल और भारत एक ही जगह पर रहा है ।’

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