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सुरंग में फंसे कर्मचारियों के बचने की उम्मीद कम, सातवें दिन सरकार ने कंपनियों को दी रेस्क्यू की अनुमति

 

काठमांडू, 1 सितंबर।

रसुवा और नुवाकोट में आई विनाशकारी बाढ़ के सात दिन बाद नेपाल सरकार ने आखिरकार जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों और मजदूरों की खोज एवं बचाव कार्य में परियोजना प्रवर्तक कंपनियों को सीधे शामिल होने की अनुमति दे दी है। अब कंपनियां अपने तकनीकी विशेषज्ञों और भारी उपकरणों के साथ रेस्क्यू अभियान में उतरेंगी।

अब तक सरकार “एकद्वार प्रणाली” (सिंगल कमांड सिस्टम) के तहत केवल नेपाली सेना के नेतृत्व में बचाव अभियान चला रही थी। इसी कारण परियोजनाओं की निर्माण कंपनियों और उनके तकनीकी कर्मचारियों को सुरंगों में प्रवेश कर खोज एवं बचाव कार्य करने की अनुमति नहीं दी गई थी। लेकिन सात दिनों की कोशिशों के बावजूद सेना सुरंगों में फंसे लोगों तक नहीं पहुंच सकी।

अब तकनीकी टीम संभालेगी मोर्चा

अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद सरकार ने संबंधित जलविद्युत परियोजनाओं की कंपनियों को अपने इंजीनियरों, तकनीकी कर्मचारियों और आवश्यक उपकरणों के साथ रेस्क्यू अभियान में शामिल होने की अनुमति दे दी है।

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लाङटाङ खोला जलविद्युत परियोजना के प्रवर्तक विजयमान भट्टराई ने बताया कि नेपाली सेना सुरंग के भीतर लगभग 100 मीटर तक पहुंची थी, लेकिन इसके आगे जाना संभव नहीं हुआ। इसके बाद सेना ने परियोजना की तकनीकी टीम से आगे का काम संभालने को कहा।

भट्टराई के अनुसार, तकनीकी टीम की जरूरत पहले दिन से ही थी, लेकिन सरकार की व्यवस्था के कारण उन्हें मौके पर काम करने नहीं दिया गया। अब सरकारी एजेंसियों और परियोजना की टीम मिलकर समन्वय के साथ बचाव अभियान चलाएंगी।

उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर और वाहन घटनास्थल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, इसलिए भारी उपकरणों और लिफ्टिंग मशीनों की व्यवस्था परियोजना कंपनियों को ही करनी होगी। फिलहाल टीम काठमांडू में जरूरी उपकरण खरीदने और जुटाने में लगी हुई है।

नई रणनीति से होगा रेस्क्यू

भट्टराई ने कहा कि पहले अपनाई गई रणनीति से कोई परिणाम नहीं मिला, इसलिए अब नए तरीके से अभियान आगे बढ़ाया जाएगा। आवश्यक मशीनें और तकनीकी सामग्री जुटाने के बाद टीम परियोजना स्थल के लिए रवाना होगी।

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इसी तरह 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली–1 परियोजना का निर्माण कर रही नेपाल वाटर एंड एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी (एनडब्ल्यूईडीसी) ने भी अपने इंजीनियरों और उपकरणों की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी शुरू से ही अपने तकनीकी कर्मचारियों को बचाव कार्य में भेजना चाहती थी, लेकिन सरकार की अनुमति नहीं मिलने से ऐसा संभव नहीं हो पाया था।

अब भी 894 कर्मचारी और मजदूर लापता

10 भाद्र (27 अगस्त) को आई भीषण बाढ़ से रसुवा और नुवाकोट की 12 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुईं। अब तक 894 कर्मचारी और श्रमिक लापता हैं।

प्रमुख परियोजनाओं में लापता लोगों की संख्या इस प्रकार है:

परियोजना लापता
अपर त्रिशूली–1 (216 मेगावाट) 573
रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट) 93
लाङटाङ खोला जलविद्युत परियोजना (20 मेगावाट) 41
अपर त्रिशूली–3ए (60 मेगावाट) 42

रसुवागढ़ी परियोजना में नेपाली सेना ने भूमिगत पावरहाउस की तलाशी ली, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। हालांकि कंपनी का कहना है कि ड्यूटी पर मौजूद तीन कर्मचारी अब भी लापता हैं।

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सुरंग के भीतर पानी बना सबसे बड़ी चुनौती

नुवाकोट स्थित अपर त्रिशूली–3ए परियोजना की सुरंग में सोमवार को भी बचाव अभियान जारी रहा। रेस्क्यू टीम ने लगातार 24 घंटे तक सुरंग का प्रवेश द्वार साफ करने, पानी निकालने और भीतर जाने लायक रास्ता बनाने का काम किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार सुरंग के भीतर अब भी बड़ी मात्रा में पानी भरा हुआ है, जिससे बचाव अभियान बेहद जोखिमपूर्ण और कठिन बना हुआ है।

सोमवार को नेपाली सेना के नेतृत्व में इंजीनियरों और ड्रोन विशेषज्ञों की टीम भी सुरंग के भीतर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने गई थी।

सरकार को उम्मीद है कि परियोजना कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता और आधुनिक उपकरणों के शामिल होने से सुरंगों में फंसे लोगों की खोज और बचाव अभियान में तेजी आएगी, हालांकि सात दिन बीत जाने के कारण जीवित बचने की संभावना लगातार कम होती जा रही है।

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