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मांग सम्बोधन किए बिना सरकार में शामिल नहीं होंगे : राजेन्द्र महतो

 

हिमालिनी, मई अंक २०१८ | आज राजपा के सामने मुख्यतः दो कार्यनीति है । प्रमुख कार्यनीति शक्तिशाली संगठन का निर्माण करना है, उसके लिए पार्टी को महाधिवेशन में ले जाना है । स्थानीय स्तर से लेकर केन्द्र तक संगठन को दुरुस्त बनाना है । इसीलिए अब एक साल राजपा अपनी पूरी ताकत के साथ संगठन निर्माण के लिए लग जाएगी । अर्थात् आगामी वर्ष हमारे लिए ‘संगठन निर्माण का वर्ष’ रहेगा । आपसी सद्भाव और एकता को मजबूत बनाकर आगे बढ़ना है । जिस एजेण्डा और उद्देश्य के लिए हम लोग इकठ्ठा हुए हैं, राजपा गठन किए हैं, उन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सड़क से लेकर सदन तक, प्रदेश सरकार से लेकर केन्द्र सरकार तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा । जनता की आकांक्षा और मांग को पूरा कराने के लिए ही राजपा अपनी रणनीति तय करेगी । तत्काल हम लोग सरकार में जाने की तैयारी में नहीं हैं । अगर हमारी मांग और एजेण्डा में सरकार सकारात्मक दिखाई देती है तो सरकार में शामिल होने के बारे में सोच भी सकते हैं ।

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राजेन्द्र महतो, सांसद्
नेता, अध्यक्ष मण्डल

लेकिन हमारी मांग और दृष्टिकोण में सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण क्या है, अभी तक सामने नहीं आया है । जब आएगा, उसके बाद ही सरकार के बारे में विचार–विमर्श किया जाएग ।

हमारे लिए दूसरी प्राथमिकता जनता की जो एजेण्डा और मांग हैं, उसके लिए संघर्ष करना है । जनता की मांग है– संविधान संशोधन । जिस वक्त नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार थी, उस समय में भी संविधान संशोधन के लिए हम लोगों ने प्रयास किया, लेकिन संशोधन के पक्ष में दो–तिहाई न होने के कारण संशोधन नहीं हो पाया । संविधान संशोधन के लिए दो–तिहाई बहुमत आवश्यक है । आज अवस्था ऐसी है, जहां एमाले के बिना दो–तिहाई बहुमत सम्भव नहीं है । लेकिन संविधान संशोधन तो करना ही है । यहां मैं एक बात को स्मरण कराना चाहता हूँ– आज से पहले ही ६ संविधान नेपाल में बन चुका है, यह सातवां संविधान है । हम चाहते हैं कि ६ संविधान का बुरा हाल हुआ, सातवां संविधान का हाल भी वैसा ही न हो । उसके लिए संशोधन की जरुरत है । मधेशी दलित, जनजाति, मुस्लिम, थारु समुदायों ने आन्दोलन के जरिए जो आवाज उठाई है, उस आवाज को संविधान में समावेश करना चाहिए । अगर संविधान जनभावना और समस्या को सम्बोधन नहीं कर पाता है तो वह संविधान कागजों में सिमट कर रह जाएगा । राजपा की कामना है कि सातवां संविधान दीर्घकालीन हो सके ।

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