Sun. Apr 19th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

बसन्त रचित ‘वसन्त’ पर साहित्यकारों के बीच चर्चा–परिचर्चा

 

लिलानाथ गाैतम /काठमांडू, १९ जून ।

साहित्यकार तथा कवि बसन्त चौधरी द्वारा रचित तथा विभिन्न ९ भाषा में प्रकाशित कविता संग्रह ‘वसन्त’ पर आज (मंगलबार) साहित्यकार, समीक्षक तथा पत्रकारों के बीच चर्चा–परिचर्चा और समीक्षा की गई है । कविता संग्रह ‘वसन्त’ पर अपनी मन्तव्य रखते हुए साहित्यकार सावित्री मल्ल ने कहा कि बसन्त चौधरी द्वारा रचित कविताओं मे आदर्श जीवन की परिकल्पना और जीवन दर्शन मिलती है, जो जीवन को मार्गनिर्देश करती है । उनका यह भी कहना है कि कविता सरल और सहज भाषा में रचित होते हुए भी लोगों को भावविह्वल कर देता है ।


साहित्यकार मल्ल को यह भी मानना है कि कवि चौधरी द्वारा रचित कविताओं में समाज परिवर्तन करने की शक्ति और लोगों को दृष्टिकोण में परिवर्तन कराने की शक्ति भी है । उन्हों ने कहा कि कविताओं में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रप्रति के जिम्मेवारी बोध भी है । कार्यक्रम के अन्य वक्ताओं ने भी साहित्यकार मल्ल द्वारा व्यक्त विचार को स्वीकार करते हुए कहा कि साहित्यकार चौधरी द्वारा रचित कविता पढ़ने के बाद पता चलता है कि वह एक कुशल और सफल साहित्यकार हैं ।

यह भी पढें   विश्वविद्यालयों से राजनीतिक छात्र संगठनों की संरचना हटाने का सरकार का निर्णय, सुरक्षा देने की भी घोषणा


कार्यक्रम में बोलते हुए दूसरे वक्ता तथा साहित्यकार कुमारी लामा ने कहा कि चौधरी द्वारा रचित कविताएं विभिन्न ९ भाषा में प्रकाशित होना सुखद् है । उन्होंने यह भी कहा कि कवि चौधरी द्वारा रचित अधिकांश कविता प्रेमभाव से भरिर्पूण है । लेकिन लामा को कहना है कि वह प्रेम सिर्फ दो विपरित लिंगी (महिला–पुरुष) प्रति के आकर्षण में सिमित नहीं है । उनका मानना है कि चौधरी रचित कविताओं में देश प्रेम, प्रकृति प्रेम होते हुए भी प्रेम के जरिए वह जीवन दर्शन भी बांटते हैं । साहित्यकार लामा ने कहा– ‘कवि चौधरी द्वारा रचित कविता अत्यन्त सरल है, कोमल है, पढ़ते वक्त पाठकों को अनुभूति प्रदान करने में और कविताओं की भाव मेंपाठकों को डूबाने में सक्षम हैं ।’ लामा को यह भी मानना है कि कवि चौधरी अपने कविता में प्रेम को जीवन शक्ति के रुप में प्रस्तुत करते हैं । साथ में उन्होंने यह भी कहा कि कविता ने समय की बहाव को भी पकड़ लिया है ।

यह भी पढें   नेपाल-भारत सीमा पर बढ़ी नाराज़गी, सरकार मौन, सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने भी उठाए सवाल


इसीतरह कवि डॉ. लक्ष्मण गौतम, बसन्त रचित कविताओं को वेद की मन्त्र के साथ तुलना करते हैं । उनका मानना है कि जिसतरह वेद में अन्तरनिहित शब्द उच्चारण करने से लोगों में तरंग पैदा होती है, उसी तरह बसन्त रचित कविता और शब्द में में भी वह शक्ति दिखाई देती है । डा. गौतम आगे कहते है– ‘कविता दो किसिम से पढ़ा जाता है । एक हृदय से, दूसरा मस्तिष्क से । कवि चौधरी द्वारा रचित कविताएं हृदय से पढ़ा जाता है ।’ उनका यह भी मानना है कि चौधरी रचित कविता प्रेमभाव से भरिपूर्ण है, लेकिन उसमें आवेग और सम्वेग नहीं, उसमें जीवन का आदर्श और दर्शन पाया जाता है ।
कविता संग्रह के ऊपर विचार–विमर्श होने के बाद साहित्यकारों ने कवि चौधरी के साथ प्रश्न–उत्तर भी किया । शुभेच्छुक साहित्यकारों की प्रश्न और जिज्ञास के संबंध में जवाफ देते हुए कवि चौधरी ने कहा कि वह सिख रहे हैं, लेखनी को और भी मजबूत बनाना बांकी है । साहित्यकार चौधरी को यह भी कहना है कि वह नेपाली और हिन्दी भाषा में लिखने के लिए ज्यादा सहज महसुस करते हैं । लेकिन उनका यह भी मानना है कि हिन्दी के तुलना में नेपाली में लिखने के लिए शब्द का अभाव पड़ जाता है । उन्होंने कहा– ‘अगर मैं हिन्दी में लिखना शुरु करता हूं तो मैं ऊर्दू और फारसी से भी शब्दों का प्रयोग कर सकता हूं, लेकिन नेपाली में नहीं । कार्यक्रम के अधिकांश वक्ताओं ने सुझाव दिया कि साहित्यकार चौधरी को सिर्फ कविता ही नहीं, अब अख्यान लेखन में भी आगे आना चाहिए । कार्यक्रम सञ्चालन साहित्यकार राजेन्द्र सलभ ने किया था ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed