Sat. Jun 6th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

नेपाल-भारत सीमा पर बढ़ी नाराज़गी, सरकार मौन, सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने भी उठाए सवाल

 

 

काठमांडू , 19 अप्रैल । नेपाल–भारत सीमा पर सरकार द्वारा लागू किए गए नए भन्सार (कस्टम) नियम को लेकर अब राजनीतिक स्तर पर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। खास बात यह है कि इस फैसले का विरोध सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने भी इसे अव्यवहारिक बताते हुए पुनर्विचार की मांग की है।

सरकार ने हाल ही में यह प्रावधान लागू किया है कि भारत से 100 रुपये से अधिक मूल्य का सामान लाने पर अनिवार्य रूप से कस्टम शुल्क देना होगा। इस निर्णय का सबसे अधिक असर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों पर पड़ा है, जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सीमापार आवागमन करते हैं।

यह भी पढें   योगी अंकित नाथ महाराज जी का ग्यारह दिवसीय अग्नि हठ योग जनकपुरधाम में संपन्न

सत्तारूढ़ दल के सांसदों की आपत्ति

मधेश प्रदेश से निर्वाचित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के कुछ सांसदों ने गृहमंत्री सुधन गुरुङ से मुलाकात कर इस विषय में गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने सीमा प्रबंधन को सरल और नागरिक–अनुकूल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सांसदों का कहना है कि अवैध तस्करी पर नियंत्रण जरूरी है, लेकिन व्यक्तिगत उपयोग के लिए लाए जाने वाले छोटे–मोटे सामान पर भी सख्ती करना आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।

“ऐतिहासिक संबंधों को नज़रअंदाज़ न करें”

सिरहा–4 से सांसद तपेश्वर यादव ने नेपाल–भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की कठोर नीति इन संबंधों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस निर्णय के सामाजिक प्रभावों पर भी विचार करे।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 6 जून 2026 शनिवार शुभसंवत् 2083

इसी तरह सिरहा–2 के सांसद शिवशंकर यादव ने कहा कि तस्करी नियंत्रण एक सकारात्मक पहल है, लेकिन सभी नागरिकों पर एक समान नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट और संतुलित नीति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

सड़क पर उतरे युवा

इस मुद्दे को लेकर मधेश क्षेत्र के युवाओं में भी आक्रोश बढ़ता दिख रहा है। काठमांडू के माइतीघर में युवाओं ने प्रदर्शन करते हुए इस नए कस्टम प्रावधान को तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार का यह निर्णय सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित कर रहा है।

यह भी पढें   नेपाल -भारत सम्बन्ध एक नए युग की तरफ बढने के लिए प्रतिबद्ध : रवि लामिछाने

सरकार का पक्ष

सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि यह कदम अवैध तस्करी, मादक पदार्थों के कारोबार और मनी लॉन्ड्रिंग को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में लंबे समय से इन गतिविधियों को लेकर चिंता बनी हुई थी।

बढ़ता राजनीतिक और सामाजिक दबाव

हालांकि, जमीनी स्तर पर बढ़ते असंतोष के कारण यह मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील बनता जा रहा है। यदि सरकार जल्द ही इस पर स्पष्ट और संतुलित समाधान नहीं निकालती, तो आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहराने की संभावना है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *