Mon. Nov 2nd, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

साहित्यकार लाठ रचित ‘छमिया’ का लोकार्पण

 

काठमांडू, २८ जुलाई । उद्योगपति तथा साहित्यकार गणेश लाठ द्वारा रचित व्यंग्य कथा संग्रह ‘छमिया’ का लोकर्पण किया गया । शनिबार काठमांडू बानेश्वर स्थित लेखन कुञ्च में आयोजित एक विशेष समारोह के बीच राजनीतिक विश्लेषक तथा लेखक सीके लाल और बामपन्थी बुद्धिजीवी तथा राजनीतिज्ञ घनश्याम भुसाल ने पुस्तक का लोकार्पण किया । कार्यक्रम में दर्जनों गिनेचुने वरिष्ठ साहित्यकार, समालोचक, व्यवसायी और पत्रकारों की उपस्थिति रही ।

पुस्तक विमोचन के बाद कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए विश्लेषक लाल ने कहा कि लाठ रचित ‘छमिया’ में मध्यम वर्गीय समाज की कथा है, जो व्यंग्यात्मक भाषा और साहित्य के रूप में आम पाठकों के बीच प्रस्तुत की गयी है । उनका यह भी मानना है कि लेखक लाठ ने ‘छमिया’ को अधिक से अधिक पाठकों को लक्षित कर सहज भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है । लेखक लाल ने यह भी कहा कि व्यंग्य में किसी के प्रति कटाक्ष हो सकता है और हास्यानुभूति भी, जो भी हो उसके जरिए मानव हृदय को परिवर्तन करने की शक्ति भी उसमें होनी चाहिए ।

इसीतरह कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए बहुभाषिक साहित्यकार गोपाल अश्क ने कहा कि वीरगंज ने एक और साहित्यकार को जन्म दिया है । उनका मानना है कि स्थानीय भाषा और साहित्य के लिए वीरगंज में ध्रुवचन्द्र गौतम और मुकुन्द आचार्य के बाद गणेश लाठ सशक्त साहित्यकार के रूप में उभर रहे हैं ।

यह भी पढें   पत्रकार विश्वमणि सुवेदी गिरफ्तार

साहित्यकार तथा समीक्षक मदन लम्साल का मानना है कि साहित्यकार लाठ ने अपनी कृति में परिवार, समाज तथा राजनीति में व्याप्त तमाम विकृतियों का फर्दाफास किया है । उन्होंने कहा कि लाठ अपनी कृति में हर व्यक्ति को एक ‘चोर’ प्रमाणित करना चाहते हैं, जो एक हद तक सही भी है । उनका मानना है कि समाज में ऐसे कई व्यक्ति रहते हैं, जो किसी न किसी रूप में चोरी करते हैं । समीक्षक लम्साल ने कहा कि– ‘अगर कोई साहित्यकार बनाना चाहते हैं तो उनको किसी न किसी हद तक पागल होना जरुरी है और लाठ पागलपन की शुरुआती चरण में हैं ।’ उनका कहना है कि अगर समाज के सामान्य नियम से साहित्य लिखा जाता है तो वह रुचिकर साहित्य नहीं होता है, इसीलिए सामाजिक नीति और नियम को तोड़कर ही साहित्य रचना किया जाता है । अगर ऐसा होता है तो साहित्यकारों को समाज में पागल की संज्ञा भी दी जाती हैं । पुस्तक के संबंध में समीक्षक लम्साल कहते हैं कि ‘छमिया’ में नयां साहित्यिक बिम्ब कम मिलता है, लेकिन कुछ ज्यादा ही ‘उखान–टुक्का’ प्रयोग किया गया है । उन्होंने यह भी कहा कि ‘छमिया’ में कई हिन्दी शब्द आए हैं जिन्हेें नेपाली भी बनाया जा सकता था ।

यह भी पढें   इनम सापकोटा प्रकरण से न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

इसीतहर दूसरे समीक्षक महेश पौडेल का कहना है कि ‘छमिया’ में समावेश हर कहानी हमारी ही कहानी है, जहाँ हम लोग खुद अपने जीवन और अनुभूतियों को महसूस कर सकते हैं । उनका यह भी मानना है कि आम साहित्यकार जो नहीं लिखते हैं, ‘छमिया’ में साहित्यकार लाठ ने वही चीज लिखा है । पौडेल का मानना है कि ‘छमिया’ के अन्दर पारिवारिक सम्बन्धों में व्याप्त विकृति, समाजिक, राजनीतिक तथा व्यवसायिक क्षेत्रों में मौजूद विकृतियों के बारे में खुलकर लिखा गया है, जो पठनीय है । उन्होंने कहा कि अगर पुस्तक पढ़ने के लिए बैठ जाते हैं तो पुस्तक अपनी ओर इस तरह खींच लेता है कि उसको खतम किए बिना लोग नहीं उठ पाते । समीक्षक पौडेल ने कहा– ‘आम मान्यता है कि बिजनेसमैन साहित्यकार नहीं बन सकते हैं, लेकिन इस कथन को उद्योगपति लाठ ने गलत साबित किया है ।’ उनका मानना है कि लाठ ने अपने लेखन में अपने ही व्यापारिक घरानों की पोल खोल दी है ।

बाम बुद्धिजीवी तथा राजनीतिज्ञ घनश्याम भुसाल का मानना है कि प्रायः हर साहित्य तत्कालीन सत्ताधारियों के चरित्र के आसपास रहकर ही लिखा जाता है । उनका कहना है कि साहित्य की विषयवस्तु, उद्देश्य और चेतना तत्कालीन सत्ता के इर्दगिर्द रहकर ही रचना की जाती है । उन्होंने आगे कहा– ‘गैर नेपाली भाषी तथा मारवाडी समुदाय के होने से भी उन्होंने नेपाली भाषा में साहित्य सृजना कर नेपाली भाषा की श्रीवृद्धि के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जो सराहनीय है ।’

यह भी पढें   गणतंत्र से गुणतंत्र की ओर : अजय कुमार झा

कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए हिमालिनी मासिक के प्रबन्ध निर्देशक सच्चिदानन्द मिश्र ने कहा कि लाठ रचित ‘छमिया’ नेपाली साहित्य में एक महत्वपूर्ण कृति है, जो हिन्दी भाषा में भी अनुवाद होना जरुरी है । लक्ष्मण गाम्नामे, सरोज घिमिरे आदि वक्ताओं ने भी पुस्तक और लेखक लाठ के बारे में चर्चा करते हुए शुभकामना व्यक्त की । लेखक लाठ ने उपस्थित साहित्यकार, समीक्षक तथा पाठककों सम्बोधन करते हुए कहा कि उनका लेखन कार्य निरन्तर जारी रहेगा, इस के लिए आम पाठकों की सकारात्मक आलोचना और समीक्षा की जरुरी है, जिसको लेकर वह आगे दिन में खुद को सुधार कर सकें और उत्कृष्ट साहित्य रचना के लिए प्रेरित हो सके ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com