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वीरगंंज मेंं नेपाल¬ भारत साहित्य महोत्सव शुरु

 

वीरगंज, 12अगस्त ।
औद्योगिक नगरी वीरगंज मेंं नेपाल भारत साहित्य महोत्सव शुरु हो गया है । दो दिनों तक जारी रहनेवाला उक्त महोत्सव का उद्घाटन प्रदेश नं. २ के मुख्यमन्त्री लालबाबु राउत ने किया । कार्यक्रम को उदघाटन करते हुए मुख्यमन्त्री राउत ने कहा कि महोत्वस ने दो देशों के साहित्यकारों को इकठा कर आपसी सम्बन्ध को मजबूती प्रदान की है । उनका यह भी मानना है कि साहित्यकारों की कोई भी सीमा नहीं होती है, जो दो देशों की राजनीतिक सीमा के अन्दर ही सिमट कर रह जाए । मुख्यमन्त्री ने कहा कि दोनों देश साहित्य में समृद्धि के बावजूद दुनिया में कोई पहचान स्थापित करने में ज्यादा सफलता प्राप्त नहीं कर पाए हैं । इसके लिए हमें आगे आना पडेगा, अनुवाद के जरिए नेपाल के साहित्य को विश्वस्तर पर स्थापित करना होगा ।


कार्यक्रम में मुख्यमन्त्री राउत ने कहा कि साहित्य के बिना जीवन भी अधूरा रहता है । उन्होने आगे कहा, हम लोगों ने शेक्सपियर को पढा हैं, प्रेमचन्द को पढा हैं, महाकवि लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा को भी पढा हैं, और युरोप, अमेरिका तथा अन्य पश्चिमी देशों के साहित्यकारों को भी पढतें है, अगर सीमा रहती तो यह सम्भव नहीं होता । मुख्यमन्त्री राउत का मानना है कि साहित्य के जरिए ही आम आदमी खुश रह पाते हैं । उन्होंने कहा कि कई डाक्टर, इन्जीनियर और पाइलट हैं, जो अपने जीवन में खुश नहीं है, लेकिन साहित्यकार खुश हो रहे है । मुख्यमन्त्री राउत को मानना है कि जीवन जीने की कला ही साहित्य में है ।

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नेपाल भारत सहयोग मंच, ग्रीन केयर सोसाइटी और हिमालिनी मासिक के संयुक्त आयोजन में यह कार्यक्रम आयोजित है । कार्यक्रम के संयोजक गणेश लाठ ने अपनी शुभकामना मन्तव्य में कहा कि १० सालो से जारी प्रयास आज आकर साकार हो गया है । उनका कहना है कि १० सालों से वीरगंज में नेपाल भारत साहित्य महोत्सव करने की सोच बनी थी । उद्योगपति तथा साहित्यकार भी रहे लाठ ने कहा कि कई साहित्यकारों कह रहे थे की साहित्यिक दृष्टिकोण से वीरगंज कुछ सालों से मृत लाश की तरह हो रहा था, लेकिन महोत्सव कर वीरगंज ने पुष्टि किया है कि वीरगंज मृत नहीं, जिन्दा है ।
कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि आचार्य महाश्रमण के विदुषी शिष्य डा. चरित्र प्रज्ञा ने कहा कि साहित्यकार और सन्त ही देश को मार्गदर्शन कर सकते हैं । उनका मानना है कि अगर साहित्यकार और सन्त नहीं होते थे तो समाज और राष्ट्र को सही गाइडलाइन नहींं मिल सकता था । अध्यात्म ही हमारी आत्मा को पवित्र करता है और हमेशा हमें सच का साथ देना चाहिए, हम जो भी लिखें,जो भी कहें सत्य कहें और सत्य लिखें । कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए वीरगंज स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के महावाणिज्यदूत विसी प्रधान ने कहा कि नेपाल भारत संबंध सिर्फ राजनीतिक ही नहीं, सामाजिक और सांस्कृतिक भी है, जो आपसी सम्बन्ध को मजबूती प्रदान करती है । उनका यह भी मानना है कि नेपाल भारत साहित्य महोत्सव वीरगंज करने से अब वीरगज संकीर्ण प्रवेश द्वार से खुला प्रवेश द्वार के रुप में विकसित हुआ है । सभाध्यक्ष अशोक वैद्य जी ने विदुषी शिष्य चरित्र प्रज्ञा जी की जीवन पर विशेष प्रकाश डालते हुए अपने शुभकामना मन्तव्य में कहा कि यह महोत्सव हमारे लिए एक गौरव की बात है, हम कृतज्ञ हैं भारतीय अतिथियों का, जिन्होंने हमें आतिथ्य का अवसर दिया और साथ ही आभार व्यक्त करते हैं विदुषी शिष्य चरित्र प्रज्ञा जी का, जिन्होंने ने अपना अमूल्य समय हमें दिया और अपने आशिर्वचनों से हमें कृतार्थ किया ।

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कार्यक्रम में वीरगंज में रहकर साहित्य क्षेत्र में विशिष्ठ योगदान देनेवाले ध्रुवचन्द्र गौतम, भारतीय से आए हुए वरिष्ठ साहित्यकार डा. योगेन्द्रनाथ शर्मा अरुण आदियों को सम्मान भी किया गया ।
कार्यक्रम में ग्रिन केयर सोसाइटी के अध्यक्ष डा. विजय पण्डित जी ने कहा कि यह साहित्यिक यात्रा अनवरत रुप से जारी रहेगी और हम इसे अगले वर्ष भी हिमालिनी के सहयोग से निरन्तरता प्रदान करेंगे ।
कार्यक्रम में साहित्यकार एवं समीक्षक महेश पौडेल ने नेपाल भारत साहित्य यात्रा २०१८, वीरगंज, हमारी साहित्यः वैकल्पिक ज्ञानकोष एक संकल्पना विषयक कार्यपत्र प्रस्तुत किया । कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि तथा मुख्यमन्त्री राउत द्वारा नेपाल भारत महोत्सव पर आधारित स्मारिका और हिमालिनी की सम्पादक डा. श्वेता दीप्ति लिखित दो साहित्यिक पुस्तकों का विमोचन भी किया गया ।
महोत्सव में नेपाल और भारत के करीब २ सौ से अधिक साहित्यकार इकठा हुए है । उद्घाटन सत्र के बाद कार्यक्रम को दो सत्र में बांट कर संचालन किया जा रहा है । जहाँ गद्य और पद्य को अलग अलग विधा के रुप में प्रस्तुत कर साहित्यकार भी अलग अलग दो जगह में विभाजित होकर विचार विमर्श कर रहे हैं ।

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