Sun. Jul 12th, 2020

तल्ख उनके लफ्ज तरस ना खाने लगे, इसलिए खुद को पत्थर बनाते रहे हम : रश्मि

रश्मि

जमाने की नजर ना लगे

इसलिए आंखों में काजल लगाते रहे हम
आंसुओं को जब्त सीने में ही
नजरों से बचा कर जीते रहे हम
कालिख से खुद को रंग ना दें 
इसलिए काजल का बांध सजाते रहे हम

नासूर बन चुका खारा आँसू
फिर भी उसे सीने में छुपाते रहे हम
जमाना ना हंस दे
इसलिए खुद को हंसाते रहे हम
तल्ख उनके लफ्ज तरस ना खाने लगे
इसलिए खुद को पत्थर बनाते रहे हम।

यह भी पढें   बड़े वाहन योग्य सड़क से जुड़ा शिकारीदेवी,अब होगा शिकारीदेवी में पर्यटन का सूत्रपात:-

 

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: