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प्रदेश नं. २ का नाम और राजधानी के लिए गठित आयोग असफल !

 

 

 

 

 

 

जनकपुरधाम, १६ दिसम्बर । प्रदेश नं. २ का नाम, स्थायी राजधानी और भाषा के संबंध में सुझाव देने की जिम्मेदारी सहित गठित आयोग ने निर्धारित समय में अपना काम सम्पन्न नहीं किया है । ४५ दिनों की समयावधि सहित गठित आयोग की समयावधि खत्तम हो चुका है । लेकिन अभी तक प्रदेश की नाम और स्थायी राजधानी के लिए आयोग ने अपना सुझाव नहीं दिया है, जिस में आयोग असफल दिखाई दिया है । ४५ दिनों की अवधि में आयोग से सिर्फ १ जिला (पर्सा) में सुझाव संकलन किया है ।
गत कात्र्तिक ११ गते प्रदेश नं. २ सरकार की ओर से डा. हरिवंश झा के नेतृत्व में आयोग गठन किया था । आयोग की समयावधि मार्गशीर्ष २७ में ही खत्तम हो गया है । आयोग का कहना है कि ४५ दिनों में सभी जिलों में जाने के लिए सम्भव नहीं रहा, इसीलिए अब थप दो महीनों की समयावधि आवश्यक है । समाचार स्रोत का कहना है कि आयोग की ओर से प्रदेश सरकार समक्ष २ महीनों की समयावधि मांग हो चुकी हैं । लेकिन प्रदेश सरकार १५ दिनों की समयावधि देने के पक्ष में दिखाई दिया है ।
स्मरणीय है, प्रदेश नं. २ की राजधानी जनकपुर रखने के लिए प्रायः सभी नेता लगभग सहमत हैं । बारा, पर्सा, और रौतहट के कुछ नेता जनकपुर को लेकर विरोध तो कर रहे हैं, लेकिन समाचार स्रोत का मानना है कि वे लोग भी जनकपुर को स्थायी राजधानी बनाने के लिए आन्तरिक रुप में सहमत हैं । लेकिन प्रदेश नामांकन और प्रदेश की भाषा के संबंध में राजनीतिक दल और नेताओं के बीच तीव्र मतभेद हैं ।
नामाकरण के संबंध में सत्तारुढ दल राष्ट्रीय जनता पार्टी और संघीय समाजवादी फोरम नेपाल ‘मधेश’ शब्द के प्रति नजदीक हैं । लेकिन प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी और नेपाली कांग्रेस के कई प्रदेश सांसद् ‘मधेश’ शब्द के प्रति सहमत नहीं दिखाई देते हैं । प्रतिपक्षी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी ‘मिथिला’ या ‘जनक’ प्रदेश के पक्ष में दिखाई देती हैं तो नेपाली कांग्रेस ‘मिथिला’ या ‘मिथिला–भोजपुरा’ के पक्ष में दिखाई दी है ।

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