नेपाल–भारत वैदिककालीन सांस्कृतिक पुनरुत्थान हेतु अभियान

लिलानाथ गौतम÷काठमांडू, २५ दिसम्बर ।
नेपाल–भारत की वैद्धिककालीन सांस्कृतिक पुनरुत्थान हेतु इण्डो–नेपाल समरसता ऑर्गनाइजेशन ने एक पहल किया है । उक्त ऑर्गनाइजेशन की ओर से दिसम्बर २६ और २७ के दिन काठमांडू में एक भव्य कार्यक्रम आयोजन हो रहा है, जो एक अभियान भी है । इण्डो–नेपाल समरसता ऑर्गनाइजेशन के सचिव कुलदीप शर्मा के अनुसार ‘भारत–नेपाल संगोष्ठी’ नाम से आयोजित यह कार्यक्रम एक सामाजिक अभियान है, जो सन् २०१० से जारी है । विशेषतः २६ तारीख अर्थात् आगामी बिहीबार काठमांडू (कमलपोखरी) स्थित रसियन कल्चर सेन्टर में एक विशेष कार्यक्रम होने जा रहा है, जहाँ नेपाल और भारत के २५० से अधिक बौद्धिक लोग सहभागी होंगे ।
ऑर्गनाइजेशन के सचिव शर्मा ने कहा कि उक्त कार्यक्रम में नेपाल और भारत के कई बुद्धिजियों की सहभागिता रहेगी, जो सामाजिक, न्यायिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्र से जुडे हुए हस्तियां भी हैं । उन्होंने कहा– ‘हमारी कोई भी राजनीतिक उद्देश्य नहीं है, सिर्फ नेपाल और भारत के बीच रहे जो भी वैद्धिककालीन सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध हैं, उस को हम लोग पुनर्जिवित करना चाहते हैं ।’ कार्यक्रम को लक्षित करते हुए भारत से १५० लोग नेपाल ‘डेलिगेसन’ आए हैं, जिसमें भारतीय सुप्रिम कोर्ट के एडभोकेट एपी सिंह, शिक्षाविद् सुनिल नागी भी हैं । कार्यक्रम नेपाल के पूर्व उपराष्ट्रपति परमान्द झा की विशेष उपस्थिति में होने रहा है, जहां पूर्व राजदूत डा. विष्णुहरि नेपाल और श्यामान्द सुमन भी मौजूद रहेंगे ।
ऑर्गनाइजेशन के सचिव शर्मा कहते हैं कि सिर्फ नेपाल और भारत के बीच ही नहीं, दक्षिण एसियायी देश (सार्क) में आबद्ध सभी देशों में भाइचारा की संबंध होनी चाहिए । शर्मा आगे कहते हैं– ‘इसीलिए हम लोग सार्क से जुडे भारत, भुटन, नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका, माल्दिभ्स, अफगानिस्तान जैसे देशों में जा कर आपसी सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध को मजबूत बनाने की बात करते हैं, संबंधित देशों के बुद्धिजियों से विचार–विमर्श करते हैं, सामाजिक समरसता को मजबूती प्रदान करना ही हमारा उद्देश्य है ।’ बिहीबार के लिए तय कार्यक्रम में नेपाल–भारत वैदिककालीन सांस्कृतिक पुनरुत्थान संबंधी विषयों को लेकर दोनों देशों के बौद्धिक व्यक्तित्व के बीच विचार–विमर्श के साथ–साथ सम्मान का कार्यक्रम भी रखा गया है । ऑर्गनाइजेश के सचिव शर्मा के अनुसार इण्डो–नेपाल समरसता अवार्ड से इससे पहले ही पूर्व उपराष्ट्रपति परमानन्द झा, पूर्व प्रधान न्यायाधीश खिलराज रेग्मी और वर्तमान प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली भी सम्मानित हो चुके हैं ।

अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्ति हेतु भारत मध्यपुरा (ग्राम बागपूरा) से नेपाल आए शिक्षासेवी तथा साहित्यकार कृष्ण बिहारी डोहर का कहना है कि नेपाल–भारत के बीच परम्परा से ही सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध है, जिस को मजबूत रखने के लिए इस तरह का कार्यक्रम होना आवश्यक है । इण्डो–नेपाल समरसता द्वारा संचालित अभियान में लम्बे समय से जुड़े हुए डोहर आगे कहते हैं– ‘भारत–और नेपाल के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक समानता परम्परा से ही है, जिसको हम सम्मानित नजर से दिखते हैं । दोनों देशों की सांस्कृतिक और सामाजिक विकास साथ–साथ होने से ही हम लोग आगे बढ़ सकते हैं । आज भारत में स्वच्छता अभियान विशेष जोर से चल रहा है । इसीतरह ‘बेटी बचाव, बेटी पढ़ाओ’ अभियान भी चल रहा है । इस तरह का अभियान नेपाल में भी होनी चाहिए ।’


