हिमाल, पहाड और तराई को जोड़ना, आज की आवश्यकताः पूर्व राष्ट्रपति डा. यादव
काठमांडू, २५ जनवरी । पूर्व राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव ने कहा है कि हिमाल, पहाड और तराई को सामाजिक और राजनीतिक रुप में जोड़ना आज की आवश्यकता है । गजेन्द्र नारायण सिंह की १७वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गजेन्द्र नारायण सिंह स्मृति प्रतिष्ठान द्वारा बिहीबार काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक विद्वेष देश की हित में नहीं है ।
उनका यह भी मानना है कि लोकतान्त्रिक पद्धती को मजबूत बनाने के लिए भी पहाड और तराई की एकता आवश्यक है । डा. यादव को मानना है कि तराई और पहाड को जोड़ने के लिए ही स्व. गजेन्द्र बाबु ने अपना संगठन और पार्टी का नाम सद्भावना रखे थे । सद्भाव से ही समान अधिकार सम्भव होने की बात उन्होंने कहा । पूर्व राष्ट्रपति डा. यादव ने कहा कि स्व. गजेन्द्र बाबु का आन्दोलन भी समतामूलक समाज निर्माण के लिए ही था और उन्होंने कभी भी पहाड और तराई को अलग करने की बात नहीं किया ।
डा. यादव को मानना है कि संघीयता में सिर्फ पहचान ही काफी नहीं है, आर्थिक रुप में भी संघीयता मजबूत होनी चाहिए । डा. यादव ने कहा– ‘देश को पुनसंरचना करते वक्त समाजशास्त्री, राजनीतिशास्त्री, भूगोलविद् आदि को रखकर पुनर्संरचना करना चाहिए था । प्रदेश निर्माण करते वक्त आर्थिक और प्राकृतिक स्रोत–साधनों की भागबंडा में भी खयाल करना चाहिए था ।’ उनका मानना है कि आज प्रदेश नं. २ प्राकृतिक स्रोत–साधन की दृष्टिकोण से कमजोर है । मधेश को सुरक्षित रखने के लिए चुरे संरक्षण के लिए भी उन्होंने जोर दिया ।

