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सिके राउतका मधेस मे “ईन्ट्री” राजेन्द्र और उपेन्द्र का नींद हराम

 

मनोज बनैता, लाहान, १७ मार्च । राज्य विप्लवके अभियोगमे केन्द्रीय कारागारमे सजाय काटरहे चन्द्रकान्त (सीके) राउतके रिहाई के तुरन्त बाद नेपालमे नयाँ राजनीतिक कोर्ष सुरु हुवा है ।

डा. राउत स्वतन्त्र मधेस के पक्षमे लम्बे समय से वकालत कररहे है । उनहोने तराई मधेस नेपाल का भु भाग नहि है कहतेहुवे अन्तर्राष्ट्रिस्तर पर भी लबिङ करते आए है । प्रधानमन्त्री केपी ओली और पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड के कडी मेहनत के बदौलत डा. राउतको मैदान मे उतारा गया है । उनके देशके राजनीति मे कदम रखते हि मुल्कके राजनीति दो ध्रुवमे विभाजन होते दिखरहा है । राउतको सिर्फ बाहर हि नहि बल्की उनको एक सई सुरक्षाके लिए भि गार्डके लिए दियागया है ।

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राउत जे साथ सहमति के तुरुन्त वाद ओली और प्रचण्ड रौतहट के गरुडा के सभामे मधेस केन्द्रित दल राजपा और संघीय समाजवादी फोरमको चुनौती दिया । एकबार जित्ने से हि ईतना उछ्ल्ना ठिक नहि है कहते हुवे प्रधानमन्त्री ओलीने मधेसवादी दलको चेतावनी दिया है । राजपा और संघीय समाजवादी फोरमने ईसबात पर अभितक कोई भी प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहि किया है । राउत को ‘हिरो’ बनाने के कारण राजेन्द्र महतो, उपेन्द्र यादव जैसे अन्य मधेसी नेतामे राजनैतिक अशुरक्षा का अनुभुति होते दिखरहा है ।

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राउत बाहर आते हि मधेसमे अपना राजनीतिक मैदान असुरक्षित होते दिखरहे मधेसवादी दल ओली प्रति आक्रोश मे है । ओली सरकारमे हिस्सेदारी पारहे उपेन्द्र यादव नेतृत्वका संघीय समाजवादी फोरम और ओली सरकारमे कोई भी स्थान नापाकर बेचैन होकर लौटे राजपा नेपाल प्रतिपस्पर्धात्मक राजनीति मे सामेल हुवा है ।

डा. राउत ओली सरकार से हात मिलाते हि प्रधानमन्त्री ओली राजपा उपर आक्रामक और राउत पर नरम देखागया था। ओलीका ए प्रस्तुतिको कुछ ने तराई मधेसमे उपेन्द्र और राजेन्द्र के विकल्पमे राउतका उदय के रुपमे विश्लेषण किया है।

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