Mon. Jul 6th, 2020

साै वर्षाें के बाद भी आवश्यक है छायावाद का पुनर्पाठ, मुम्बई यूनिवर्सिटी का अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार सम्पन्न

मुम्बई, 15 और 16 मार्च  2019 । छायावाद के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर मुम्बई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में देश और विदेश के विभिन्न विद्वानों ने अपना अपना विचार व्यक्त किया । इस अवसर पर जापान से पधारीं डॉ.तोमोको किकुचि ने कहा कि महादेवी वर्मा और जापानी कवयित्री निकोयो न केवल समकालीन थीं अपितु दोनों ही नारी जीवन का समान चित्र खींचती हैं। इस मौके पर प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ.करुणाशंकर उपाध्याय ने कहा कि छायावादी कवियों के समक्ष हिंदी कविता को विश्वस्तर पर प्रतिष्ठित करने की चुनौती थी जिसे उन्होने बखूबी पूरा किया। यहां विज्ञान ,धर्म, दर्शन और ज्ञान- विज्ञान के तमाम अनुशासन काव्य- संपत्ति बन जाते हैं।ये बड़ी चिंता के कवि है जो विश्वस्तरीयप्रश्न उठाते हैं। इस बहुस्तरीय , जटिल और बहुआयामी काव्य का सही मूल्यांकन होना अभी बाकी है। इस मौके पर अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए डॉ.सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा कि छायावादी कवियों के प्रति आलोचकों का रवैया बहुत अच्छा नहीं रहा।आचार्य शुक्ल से लेकर अब तक के आलोचक भी उसके साथ न्याय नहीं कर पाये हैं।मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन द्वारा एक ऐतिहासिक पहल की है। उद्घाटन सत्र में अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए पं.रविशंकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ .केशरीलाल वर्मा ने कहा कि छायावाद आधुनिक कविता का सबसे महत्वपूर्ण आंदोलन है जिसके सौ वर्ष पूर्ण होने पर इतना बड़ा और इस स्तर का दूसरा आयोजन अभी तक नहीं हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ आई.ए.एस.अधिकारी श्री राकेश मिश्र के तीन काव्य संकलनों के दूसरे संस्करण ‘चलते रहे रात भर’ ‘अटक गई नींद’तथा’ जिंदगी एक कण है ‘ का लोकार्पण भी सम्पन्न उपस्थित अतिथियों द्वारा सम्पन्न हुआ। प्रख्यात अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र ने प्रसाद के राष्ट्रीय गीत’ हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती ‘ का अत्यंत ओजस्वी पाठ करते हुए छायावादी कविता को शास्वत महत्व की कविता  बतलाया छायावाद के पुनर्पाठ की आवश्यकता काे सामयिकता के साथ जाेडते हुए नेपाल से आमंत्रित अतिथि डा श्वेता दीप्ति ने कहा कि आज के समय मे‌ काेमल भावनाएँ हमारे बीच से चुक रही हैं इस हालात में छायावाद से नई पीढी काे भी जुडना चाहिए और जीने की कला सीखनी चाहिए । इस अवसर पर महाकवि जयशंकर प्रसाद के प्रपौत्र श्री विजयशंकर प्रसाद ने विज्ञान का जानकार होने के बावजूद आंसू तथा कामायनी के बीच एक अद्भुत अंतःसूत्र संकेतित किया।इस मौके पर प्रवासी संदेश अखबार के संपादक श्री अरुण उपाध्याय का सम्मान कुलपति केशरीलाल वर्मा के हाथों किया गया।इस सत्र का सूत्र संचालन संयोजक सुनील वल्वी ने किया और डॉ.सचिन गपाट आभार ज्ञापन किया।

यह भी पढें   इंडोनेशिया में नाव डूबने से दो की मौत, सात लोग लापता

संगोष्ठी के पहले दिन भोजन के उपरांत ‘छायावाद का स्वरूप और पुनर्पाठ की संभावना’शीर्षक से सम्पन्न हुआ जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वि.वि.गांधी नगर के कुलसचिव डॉ.आलोक गुप्त ने की जबकि प्रमुख वक्ता के रूप में डाॅ.सुशीलकुमार पांडेय’साहित्येंदु’, डॉ आलोक पांडेय,डॉ.माधव पंडित, डॉ श्यामसुन्दर  पांडेय, डॉ.उर्मिला सिंह तथा डॉ.विद्याधर जोग ने छायावाद के पुनर्पाठ के लिए कतिपय महत्वपूर्ण बिंदुओं का रेखांकन किया।इस सत्र का संचालन डॉ दत्तात्रय मुरुमकर ने किया।इसके बाद दूसरे सत्र ‘महाकवि जयशंकर प्रसाद और छायावाद’ की अध्यक्षता डॉ.शीतलाप्रसाद दुबे ने की जबकि डॉ.महेंद्र प्रजापति , डॉ.दर्शन पांडेय , डॉ ऋषिकेश मिश्र , डॉ.रामविचार यादव, डॉ. महात्मा पांडेय तथा डॉ अमित मिश्र ने प्रसाद साहित्य के विविध पक्षों पर प्रकाश डाला और उसके पुनर्पाठ पर जोर दिया।इस सत्र का संचालन डॉ.हूबनाथ पांडेय ने किया।

यह भी पढें   कोरानाग्रस्त अर्थव्यवस्था और दूरगामी असर पड़ने वाला बजट : डॉ. श्वेता दीप्ति

अगले दिन प्रातः दस बजे ‘महाप्राण निराला और छायावाद’ शीर्षक से तीसरा सत्र आरंभ हुआ जिसकी अध्यक्षता प्रख्यात कवि डॉ.रमाकांत शर्मा ‘उद्भ्रांत’ ने कीइस सत्र में डॉ.श्वेता दीप्ति( नेपाल), डॉ.अवधेश शुक्ल , डॉ.नरेन्द्र मिश्र , डॉ.अशोकनाथ त्रिपाठी , डॉ.मनप्रीत कौर , डॉ.वैशाली पाचुंदे समेत एक दर्जन विद्वानों ने अपना मंतव्य प्रस्तुत किया।इस सत्र का संचालन डॉ.रेखा शर्मा ने किया। ‘प्रकृति के सुकुमार चितेरे पंत  और छायावाद ‘शीर्षक से चतुर्थ सत्र की अध्यक्षता डॉ.आनंदप्रकाश त्रिपाठी ने की जिसमें डॉ.अनीता शुक्ला , आचार्य दिव्यचेतनानंद , डॉ.मिथिलेश शर्मा , डॉ.वेद प्रकाश दुबे ने अपना अभिमत प्रस्तुत किया।इस सत्र का संचालन श्रीमती अंशु शुक्ला ने किया। इसी क्रम में डॉ.मंजुला देसाई की अध्यक्षता में महादेवी वर्मा तथा छायावाद शीर्षक से पंचम सत्र सम्पन्न हुआ । इसमें डॉ.उषा गुप्ता ,डॉ.गीता पांडेय , डॉ.अंकिता चौहान तथा डॉ.राकेश पानसे ने महादेवी वर्मा के काव्य  के विविध पक्षों का विश्लेषण किया। इस सत्र का संचालन श्रीमती कंचन यादव ने किया।

यह भी पढें   नेपाल की आर्थिक परिस्थिति में सुधारः विश्व बैंक

समापन सत्र   मुंबई विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नामित व्यवस्थापन परिषद सदस्य डॉ.दीपक मुकादम  की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.श्वेता दीप्ति और वरिष्ठ आई.ए.एस.अधिकारी श्री राकेश मिश्र ने संगोष्ठी में हुए गंभीर विमर्श को ऐतिहासिक महत्व का बतलाया।इस अवसर पर प्रख्यात चिंतक वीरेंद्र यागनिक ,डॉ.रामसागर  डॉ.सुनील कुलकर्णी  ,  जी.मीडिया के संपादक डॉ.संजय सिंह तथा डॉ.संजय प्रभाकर ने संगोष्ठी के माध्यम से छायावाद के पुनर्पाठ की दृष्टि से इस संगोष्ठी के महत्व पर प्रकाश डाला।इस सत्र का संचालन डॉ.सचिन गपाट ने किया ।हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ.करुणाशंकर उपाध्याय ने छायावाद के पुनर्पाठ के प्रतिमान बतलाते हुए आभार ज्ञापन किया।इस संगोष्ठी में देश-विदेश से लगभग तीन सौ विद्वान , प्राध्यापक और शोधार्थी शामिल हुए।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: