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डा. कृष्णजंग राणा रचित गजल संग्रह ‘तलाश’ विमोचित

 

काठमांडू, २९ मार्च । साहित्यकार डॉ. कृष्णजंग राणा रचित गजल संग्रह ‘तलाश’ का एक कार्यक्रम के बीच विमोचन किया गया । हिमालिनी मासिक द्वारा शुक्रबार काठमांडू में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि बसन्त कुमार चौधरी, विशेष अतिथि कालीप्रसाद रिजाल और सहभागी विशिष्ठ साहित्यकारों ने उक्त कृति का विमोचन किया ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए और पुस्तक के लेखक डा. राणा को शुभकामना देते हुए प्रमुख अतिथि तथा साहित्यकार बसन्त कुमार चौधरी ने कहा कि डा. राणा रचित गजल तथा कविताएं पाठकों को वशीभूत करती है । उनका मानना है कि ‘तलाश’ में संकलित गजल प्रेमपूर्ण भावनाओं से परिपूर्ण है । इसीतरह विशेष अतिथि तथा गीतकार कालीप्रसाद रिजाल का मानना है कि डा. राणा रचित हर गजल विशेष और विशिष्ट हैं ।


कार्यक्रम में पुस्तक के बारे में समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए हिमालिनी मासिक पत्रिका के सम्पादक डा. श्वेता दीप्ति ने कहा कि डा. राणा अपनी मन की भावनाओं को साहित्यिक रचनाओं में सहज रुप में व्यक्त करते हैं, जो ‘तलाश’ में भी पाई जाती है । उनका यह भी मानना है कि हर आदमी की जीवन में कोई ना कोई खोज और तलाश रहती है, जो कभी भी खत्म नहीं होती । डा. दीप्ति ने कहा कि गजल संग्रह ‘तलाश’ उसी खोज की एक परिणाम भी है ।
हिमालिनी के वरिष्ठ सलाहकार तथा राष्ट्रीय जनता पार्टी की नेतृ पुष्पा ठाकुर ने भी शुभकामना मन्तव्य देते हुए कहा कि डा. राणा ने अपनी जज्बात को गजल की माध्यम से आम पठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है, जो पठनीय है । साहित्यकार डा. रामदयाल राकेश ने कहा कि डा. राणा रचित प्रायः हरेक साहित्य प्रेममुखी भावनाओं से प्रेरित होती है । उनका यह भी मानना है कि डा. राणा रचित गजलों में उर्दू की गमक और महक होती है, जो पाठकों को छू लेता है ।

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इसीतरह नेपाल स्थित भारतीय राजदूतावास के अतासे एवं साहित्यकार रघुवीर शर्मा ने डा. राणा को शुभकामना देते हुए कहा– ‘८७ वर्षीय राणा जी ने अपनी ९वें गजल संग्रहों में ८७ गजलों का समावेश किया है, हम लोगों की शुभकामना हैं कि वह १०० साल तक स्वस्थ जीवन जिए और १०० गजलों की दूसरी संग्रह पढ़ने का हम लोगों को की अवसर प्राप्त हो सके ।’ उर्दु एकेडेमी के अध्यक्ष तथा गजलकार इम्तियाज वफा का कहना है कि हर साहित्यकार अपनी अनुभव, पीडा और खुशी को अपनी साहित्य में लिखता है, इतना ही नहीं वह अपने सामनेवाले पात्रों की हालात काे भी लिखता है । अर्थात् उनका मानना है कि हर लेखक कल्पना और भावनाओं में ही सही हर परिस्थिति से गुजरता है । उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति से डॉ. राणा भी गुजर रहे हैं । उन्होंने कहा कि गजल संग्रह तलाश में यह सब पाई जाती है ।

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कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक डा. कृष्णजंग राणा जी ने अपनी कृति में समावेश कुछ गजल वाचन (गा कर) सहभागियों को सुनाया । इसीतरह साहित्यकार तथा कार्यक्रम संचालक सनत रेग्मी, साहित्यकार शान्ति शर्मा, डा. श्वेता दीप्ति आदि वक्ताओं ने भी तलाश से कुछ गजलें सहभागी स्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया । डॉ. कृष्णचन्द्र मिश्र पब्लिकेश के निदेशक ई. सच्चिदानन्द मिश्र के सभापतित्व में सम्पन्न कार्यक्रम में नेपाली तथा हिन्दी के दर्जनों साहित्यकार उपस्थित थे ।
स्मरणीय है, ‘तलाश गजल संग्रह डा. कृष्णचन्द्र मिश्र (केसीएम) पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित कृति है और केसीएम पब्लिकेशन से ही हिमालिनी मासिक भी प्रकाशित होती आ रही है ।

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