देश के सर्वांगीण विकास हेतु ‘स्वतंत्र बौद्धिक समाज’ द्वारा मंथन कार्यक्रम
मिति 2075-12-22/23 गत्ते जनकपुर के राजदरबार होटल में ‘स्वतंत्र बौद्धिक समाज’ का पहला मंथन कार्यक्रम हुआ।
सात सत्र में बिभाजित यह कार्यक्रम पुर्णतः स्वतंत्र भाव से भावित था। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से युक्त इस कार्यक्रम के सभी सत्र पुर्णतः व्यवस्थित रहा।
कार्यक्रम संयोजक डा.श्री कृष्ण चन्द्र प्रसाद साह जी ने इस कार्यक्रम का वृहद् उद्देश्य देशकी सर्वांगीण, दूरगामी और वैज्ञानिक विकास हेतु सक्रीय होने की आवश्यकता पर जोड़ देते हुए कार्यक्रम का पुर ध्यान केन्द्रित किया गया। इ.दीपक सिह ने बताया की भ्रष्टाचार मुक्त नेपाल ही हमारा मुख्य उद्देश्य है। और इसमे मेरे अमेरिकन नेपली साथी भी सहयोग कर रहे हैं। अजय कुमार झा के द्वारा प्रस्तुत स्वतंत्र बौद्धिक समाज के औचित्य और आवश्यकता के प्रस्तावना पत्र पर विशेष मंथन कर सर्व सम्मति से स्वीकार कर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता जताया गया।
वक्ताओं ने नेपाल के वर्त्तमान राजनैतिक अवस्था का विश्लेषण करते हुए सरकार और भ्रष्टाचार एक दुसरे का पर्याय बताया गया। देश घोर अन्धकार की ओर गतिमान है, जनता पुर्णतः अशुरक्षित है, देश विकासशील नहीं अविकसित श्रेणी में पहुँच गया है। जनता असहाय और निरास हो गए हैं। वैकल्पिक उपाय के खोजी में लोग वेचैन दिखाई देते हैं।
इन सारी बातों पर गंभीरता से मंथन कर हमने सरकार पर दवाव और आम नागरिक को सुरक्षित महसूस कराने हेतु से राष्ट्रव्यापी रुपमे जनचेतना तथा सतर्कता अभियान चलाने के लिए स्वतंत्र बौद्धिक समाज का गठन किया है। इस (स्वतंत्र बौद्धिक समाज) के तदर्थ समिति के अध्यक्ष के रुप मे डा.कृष्णचन्द्र साह, उपाध्यक्ष के रूप में श्री अर्जुन पौडेल, सचिव में श्री रामकृष्ण महतो, सह सचिव शोभा महतो,कोषाध्यक्ष श्री महावीर प्रसाद मल्ली, सदस्यों में श्री उपेन्द्र साह, इंदु भूषण,शान्ति मान श्रेष्ठ,रामविलास यादव तथा सल्लाहकारों में ई. प्रकासचंद्र साह,विष्णु कुंवर,रामेश्वर महतो,उमासंकर साह,सुरेस साह, रघुवीर राय,सुधीर कुमार सिह। लगायत 16 सदस्यीय तदर्थ समिति निर्माण किया गया है। समाज को संस्थागत करने के लिए अबिलम्ब दर्ता और देशभर विस्तार का कार्य किया जाएगा।
सभी वक्ताओं और उपस्थित विद्वानों का नेपाल से भ्रष्टाचार निवारण के लिए एक मत था, और यही इस समाज का केंद्र भी रहेगा। नेपाल लगायत विदेशों में रह रहे नेपाल के सुभेक्षुओ से भी लगातार इस विषय पर संवाद चल रहा है। सबकेसब दिल खोलकर सहयोग करने के लिए तैयार हैं। नेपाल एक कदम आगे की ओर बढ़ा रहा है।



