चार दिवसीय हनुमान महोत्सव प्रवचन सहित बिभिन्न अनुष्ठान के साथ संम्पन्न
माला मिश्रा बिराटनगर । नेपाल सीमा से सटे सुपौल जिला के श्रीपुर पंचायत के सितुहर गांव में हनुमान महोत्सव के चोथे एवं अंतिम दिन के प्रवचन में आचार्य पंडित धमेंद्र नाथ मिश्र ने मधुर में संगीत के के साथ अपने वाणी से भक्त जनों के बीच कथा वाचन करते हुए हनुमान जी की लीलाओं का बखान करते हुए आचार्य बताया कि माता अंजना के लाल हनुमान को पालने में रख किसी कार्य वस कहीं चली गई थी कुछ देर बाद जब लौट के घर आई तो वीर पुत्र हनुमान को पालने में नहीं देख कर विलाप करने लगी सब से पूछे जाने पर कोई भी प्रजा हनुमान जी के बारे में कुछ बता पाने में असमर्थ थे जिससे माता अंजना के घर पुत्र जन्मोत्सव के बदले अशोक जन्मोत्सव में बदल गई चुकी पुत्र हनुमान वायु देवता के वरदान स्वरूप माता अंजना को प्राप्त हुआ था। वायु देव ने अपने पुत्र हनुमान को अचेता अवस्था में देख कुपित होकर तीनों लोकों में वायु का संचार बंद कर दिया जिससे कुछ ही देर में तीनों लोकों में वायु के संचार बिना हाहा कार मचने लगी। तब जाकर सभी देवी देवताओं ने मिलकर ब्रह्मा जी से लापता हनुमान का पता ढूंढने एवं वायु देव के कुपित होकर वायु का संसार बंद करने का हल पूछने लगे तब ब्रह्माजी ने अंतर ध्यान होकर लापता हनुमान एवं पवन देव के क्रोध के बारे में पता कर ब्रह्मा जी ने सभी देवगन के साथ मृत्यु लोक की एक गुफा में पवन देव एवं हनुमान से मिलने मृत्यु लोक पहुंच कर उन्होंने देखा कि पवन देव अपने गोद में हनुमान को अचेत अवस्था में लेकर एक गुफा में बैठे हुए हैं। तब जाकर ब्रह्मा जी ने पुत्र हनुमान को अपने शरीर के तेज से स्पर्श कर चेतना में लाए। ब्रह्मा जी के स्पर्श होते ही बीर बालक बजरंगबली हंसते हुए अपने पिता के गोद से उठ खड़े हुए। तब वायु देव ने प्रसन्न होकर वायु का संचार तीनों लोकों में करते हुए वायु देव ने ब्रह्मा जी से कहा कि हे प्रभु मेरे पुत्र हनुमान पर इंद्र ने अपने वजन से प्रहार किया जिस कारण मेरे पुत्र हनुमान के मुख ठुड्डी पर प्रभार होने के चलते बालक हनुमान मूर्छित हो गए। तब सभी देवताओं ने मिलकर उपाय खोजते हुए पवन पुत्र का नाम हनुमान रखा और इंद्र देव ने अपने वज्र के समान हनुमान के शरीर होने का आशीर्वाद देते हुए इस प्रकार पवन पुत्र हनुमान के नाम से प्रसिद्ध होकर जानै जाने लगे।इस चतुर्थदिवसीय यज्ञ को सफल बनाने में मुख्य रूप से चन्द्र शेखर झा,पवन झा का बड़ा ही सराहनीय योगदान रहा।



