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श्री लूनकरणदास–गंगादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर ने मनाया स्रष्टा सम्मान रजत महोत्सव (फोटो फिचर)

लिलानाथ गौतम
काठमांडू, १० मई । नेपाली भाषा–साहित्य और गीत–संगीत–कला जगत के लिए परिचित नाम है– श्री लूनकरणदास–गंगादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर । नेपाली भाषा, साहित्य, इतिहास, संगीत और कला क्षेत्र के उत्थान हेतु विगत २५ साल से सक्रिय इस संस्था ने अपनी रजत महोत्सव (२५वें सालगिरा) भव्य रुप में मनाया है । इसी अवसर पर नेपाली साहित्य, कला, इतिहास और संगीत क्षेत्र के विशिष्ठ ८ स्रष्टाओं को सम्मानित भी की गई ।


कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि तथा संस्कृतिविद् सत्यमोहन जोशी के हाथों इसतरह सम्मानित होनेवाले व्यक्तित्व हैं– वरिष्ठ अख्यानकार श्रीमती पद्मावती सिंह लगायत अन्य व्यक्तित्व, जिन्होंने नेपाली कला–साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है । अख्यानकार सिंह को गंगादेवी चौधरी स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया है ।
इसीतरह इतिहास शिरोमणि बाबुराम आचार्य शोध सम्मान से साहित्यिक अनुसन्धानदाता मोदनाथ प्रश्रित, सरस्वती गद्य सम्मान से वरिष्ठ साहित्यिक पत्रकार अच्युतरमण अधिकारी, नारायण गोपाल संगीत सम्मान से लोक–आधुनिक संगीतकार गणेश रसिक, अरनिको ललितकला सम्मान से चित्रकला क्षेत्र में विशिष्ठ योगदान देनेवाले किरण मानन्धर, बालकृष्ण सम रंग सम्मान से नायिका भुवन थापा चन्द, नेपाल नवप्रतिभा सम्मान से फरक क्षमता वाली सृष्टि केसी को सम्मानित किया गया है । उल्लेखित सभी (सात) पुरस्कार हर साल नेपाली कला–साहित्य में विशिष्ठ योगदान देनेवाले एक व्यक्ति को वितरण होता आ रहा है ।


साहित्य कला मन्दिर ने इसी साल से एक और नयां पुरस्कार भी स्थापना किया है । स्व. गोपाल प्रसाद रिमाल के नाम में स्थापित ‘गोपाल प्रसाद रिमाल काव्य सम्मान’ से प्रथम वर्ष वरिष्ठ कवि तथा गीतकार दिनेश अधिकारी को सम्मानित की गई । सम्मान में ताम्रपत्र के साथ नगद भी है । संस्था के अनुसार गंगादेवी चौधरी स्मृति सम्मान के लिए नगद १ लाख रुपैयां है और बांकी सभी सम्मान के लिए ५१ हजार १ रुपैयां नगद रखा गया है ।
कार्यक्रम में स्वागत मन्तव्य व्यक्त करते हुए संस्था के अध्यक्ष बसन्त कुमार चौधरी ने लूनकरणदास–गंगादेवी चौधरी साहित्यकाल मन्दिर की २५ साल की योगदान पर संक्षिप्त चर्चा की । उनका मानना है कि २५ साल की समयावधि संस्था के लिए समीक्षा और मूल्यांकन का समय भी है । अध्यक्ष चौधरी ने यह भी कहा कि विगत में संस्था की ओर से कई प्रतिबद्धता व्यक्त की गई थी, उसमें कई तो सफलता पूर्वक पूरा हो गई है, लेकिन कुछ नहीं हो पा रहा है । उन्होंने आगे कहा– ‘अब आनेवाले दिनों में बांकी काम को पूरा करना है और थप नयां काम को भी आगे बढ़ाना है । अध्यक्ष चौधरी को मानना है कि साहित्य और कला सिर्जना के अनेक स्वरुप और विधा होते हैं, जो लोगों को आपस में जोड़ता है और इसकी गहराई असिमित होती है । उन्होंने कहा कि संस्था की ओर से हरदम पुराने स्रष्टाओं को सम्मान और नये स्रष्टाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है । इस अवसर पर संस्था की कोषाध्यक्ष मेघा चौधरी मंच को सुसोभित कररहीं थीं |


सम्मानित स्राष्टाओं की ओर से बोलेते हुए कवि दिनेश अधिकारी ने कहा कि उनके लिए प्राप्त गोपाल प्रसाद रिमाल काव्य सम्मान से उनके पीढ़ी वाले साहित्यकारों को हैसाल प्रदान की है । कार्यक्रम में उन्होंने कहा– ‘गोपाल प्रसाद रिमाल परिवर्तन के लिए एक सम्वाहक है, उनके नाम से स्थापित सम्मान और पुरस्कार पहली बार मुझे ही मिला है, जिसके लिए मैं ऋणी हूँ और अधिक खूश भी ।’ उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य और कला की माध्यम से जो भाव अभिव्यक्त होता है, वह एक दूसरे को आपस में जोडता है ।
इसीतरह प्रमुख अतिथि एवं संस्कृतिविद् सत्यमोहन जोशी ने कहा कि विगत २५ साल में सामाजिक रुपान्तरण और राष्ट्र निर्माण के लिए लूनकरणदास–गंगादेवी साहित्यकाल मन्दिर ने महत्वपूर्ण योगदान किया है । उनका मानना है कि सामाजिक रुपान्तरण के लिए काम करनेवाले कला और साहित्य साधकों को पुरस्कृत कर हौसला देना भी राष्ट्र–सेवा है, पुण्य कर्म है । उन्होंने कहा कि संस्थाओं की ओर से जो भी काम हो रहा है, वह भावी पुस्ता के लिए प्रेरणादायी है ।


कार्यक्रम को समापन करते हुए संस्था के उपाध्यक्ष एवं अभिनेता हरिहर शर्मा ने कहा कि लूनकरणदास–गंगादेवी साहित्य कलामन्दिर निजी क्षेत्र से स्थापित एक मात्र ऐसी संस्था है, जिसकी तुलना अन्य किसी भी संस्था से नहीं होती । उनका मानना है कि नेपाली साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन के लिए विगत ढाई दशक से इस संस्था की ओर जो भी होता आ रहा है, वह अन्य किसी भी संस्था से नहीं हो रही है ।
कार्यक्रम में संस्था की ओर से प्रकाशित रजतवर्ष स्मारिका भी सार्वजनिक की गई है । साथ में संस्था के लिए अनवरत योगदान देनेवाले राजकुमार अधिकारी, कृष्णप्रसाद दीक्षित और राजकुमार गौतम को दीर्घ–सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया । इतना ही नहीं, कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि सत्यमोहन जोशी को उनकी शताब्दी (१०० साल) उम्र होने के अवसर पर सम्मान स्वरुप उपहार भी प्रदान की गई । स्मरणीय है, पर्सू वैशाख ३० गते जोशी का जन्म दिन है, उस दिन से वह ९९ साल पूरा कर १०० साल में प्रवेश करेंगे ।
कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था के सदस्य तथा साहित्यकार राजेन्द्र सलभ ने किया । समारोह के आयोजन में श्री साहित्यकार रमण घिमिरे की महत्वपूर्ण भूमिका थी |

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