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पत्रकार महासंघ में महिला नेतृत्व – विगत से वर्तमान : मीरा राजभण्डारी अमात्य

मीरा राजभण्डारी अमात्य, काठमांडू | विसंं १९७१ में बनारस से चन्द्र मासिक में प्रकाशित ‘स्त्री शिक्षा’ (सुकेसी) और १९८३ साल में देहरादून से प्रकाशित गोरखा साप्ताहिक में दिव्यकुमारी देवी कोइराला द्वारा लिखित ‘स्त्री शिक्षाको महत्व’ शीर्षक का लेख प्रकाशित किया गया था । उनका लेख प्रायः नीतिगत स्तर पर निर्णायक भूमिका निर्वाह करने से वंचित महिलाओं के विषय पर केन्द्रित रहता था । इसतरह सामाजिक न्याय, महिला सशक्तीकरण और महिला के मानव अधिकार के अयवयों को स्थापित करने वाली महिला पत्रकारों की खास भूमिका के विषय पर विगत से ही चर्चा होती रही है ।
पहले निर्वाचन में महिलाओं को मताधिकार प्राप्त हुआ था इस खुशी में साधना प्रधान के संम्पादकत्व में महिला मासिक पत्रिका भी प्रकाशित हुई थी । प्रजातंत्र प्राप्ति की खातिर पत्रकारों ने भी विभिन्न चरण में संगठन होने का प्रयास किया था । नेपाल पत्रकार संघ उसी का परिणाम है । पत्रकार महासंघ में महिला नेतृत्व कृष्णप्रसाद भट्टराई के सभापतित्व में वि.स. २०१२ साल में पत्रकार संघ स्थापना हुई थी । ०१९ असोज में जिस समय पशुपतिदेव पाण्डे सभापति थे सात सदस्यीय कार्यसमिति में शशिकला शर्मा (सम्पादक ः स्वास्नी मान्छे) सदस्य बनी । ततकालीन वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि उसके बाद उसके बाद के दिनों में नेपाल पत्रकार संघ महिला नेतृत्वविहीन ही रहा । प्राप्त अभिलेख अनुसार ०४३ साल के मणिराज उपाध्याय के सभापतित्व में गठित कार्यकारी समिति में चन्द्रकला आँचल’ महिला सदस्य के रूप में मनोनित हुई थीं । पर, सुशील शमशेर जबरा के साथ शादी के बाद उनकी पत्रकारिता से धीरे धीरे साथ छूट गया । पत्रकार आँचल ने पत्रकार के हित की खातिर पत्रकार कल्याण कोष की स्थापना के लिए १० हजार १० रुपए का योगदान किया था । पत्रकार महासंघ के ०४६ साल के गोविन्द वियोगी के सभापतित्व में गठित १५ सदस्यीय कार्यसमिति में प्रेमकुमारी पन्त तीसरी महिला पत्रकार के रुप में थीं । इसी तरह हरिकला अधिकारी भी सदस्य में निर्वाचित हुई थीं ।
विसं. ०४९ के बाद होमनाथ दाहाल नेतृत्व के २१ सदस्यीय कार्यकारी समिति में महिला उपस्थिति प्रभावकारी नही. रहा । ०५२ के बाद हरिहर विरही के सभापतित्व में राधा बुढाथोकी उपसभपाति में निर्वाचित हुईं । १८ सदस्यीय उसी कार्यसमिति ने महिला पत्रकार बबिता बस्नेत और जसुदा प्रधान दोनों को योजना तथा कार्यक्रम समिति में मनोनीत किया । राधा बुढाथोकी के ही नेतृत्व में धनकुटा में महिला पत्रकार का तालिम सञ्चालित किया गया और नेपाल पत्रकार संघ के इतिहास में पहली बार महिला सम्मेलन भी सम्पन्न हुआ । विसं. ०५४ के बाद किशोर नेपाल के सभापतित्व में गठित समिति में दो महिला पत्रकार मनोनित हुईं, जसुदा प्रधान ओर शोभा गौतम तथा इसी कार्यसमिति ने अमृता बास्कोटा, रमिता लामा आदि को आचार संहिता अनुगमन और भोजन उपसमिति के सदस्य में मनोनयन किया । विसं ०५६ के बाद सुरेश आचार्य की कार्यसमिति में महिला पत्रकार रमा सिंह को मनोनित किया गया था । ०५९ साल में तारानाथ दाहाल की कार्यसमिति में महिला पत्रकार निर्मला शर्मा खुली प्रतिस्पर्धा से निर्वाचित हुईं । निर्मला शर्मा के ही कार्यकाल में कुछ और महिला पत्रकारों के मनोनयन करने के सिलसिला में विष्णु शर्मा मनोनित हुईं । शर्मा के नेतृत्व में महिला समिति बनाने की परम्परा की शुरुआत हुई । जिसमें निर्मला आचार्य, यशोदा तिम्सिना, गंगा बराल, कोमल वली, शुभेक्षा विन्दु, हरिकला अधिकारी, तारा रावल, अनुराधा पौडेल आदि का मनोनयन किया गया । शर्मा के ही नेतृत्व में दूसरा महिला पत्रकार सम्मेलन सम्पन्न हुआ । इस कार्य समिति के अन्तर्गत विद्युतीय सञ्चार माध्यम प्रवद्र्धन समिति ने महिला पत्रकार रमा सिंह और स्थानीय पत्रकारिता प्रवद्र्धन उपसमिति में पार्वती श्रेष्ठ का मनोनयन किया ।
विसं. ०६२ के बाद विष्णु निष्ठुरी के सभापतित्व में गठित कार्य समिति में महिला पत्रकार दुर्गा कार्की को मनोनित किया गया । ०६५ साल में धर्मेन्द्र झा के सभापतित्व में गठित कार्य समिति में महिला आरक्षण से यशोदा तिम्सिना निर्वाचित हुईं और गौरी कठायत को भी मनोनित किया गया । पत्रकार महासंघ में महिला सदस्य कोटा से आने के बाद पत्रकार महासंघ में पहली बार समावेशी आवाज को सम्वोधन किया गया । वहीं से तीन महिला पत्रकारों के लिए आरक्षण आदि समावेशी अभियान ने सम्पूर्णता पाई । विसं. ०६८ साल में शिव गाउँले नेतृत्व के ३१ सदस्यीय कार्यसमिति में खुली प्रतिस्पर्धा से महिला पत्रकार यशोदा तिम्सिना उपाध्यक्ष पद में निर्वाचित हुईं । इस कार्य समिति में दुर्गा भण्डारी, संगीता खड्का, शान्ता बस्नेत लगायत महिला कोटा में महिला पत्रकार सदस्य निर्वाचित हुईं । दलित कोटा से एक महिला पत्रकार निशा विश्वकर्मा निर्वाचित होने के बाद महिला पत्रकारों की निर्वाचित संख्या ५ हो गई । इस कार्य समिति में नेपाल पत्रकार महासंघ में महिला पत्रकार उल्लेख्य संख्या में पहली बार निर्वाचित हुई थीं । महिला कोटा की शुरुआत भी इसी कार्यकाल से शुरु हुआ ।
इसी तरह ०७१ साल में महेन्द्र विष्ट के सभापतित्व में गठित कार्य समिति में समावेशी कोटा से उपाध्यक्ष में अनिता विन्दु निर्वाचित हुईं और महिला सचिव में संगीता खड्का निर्वाचित हुईं । इसी तरह, महिला कोटा में पवन वर्षा शाह, सरिता ढकाल तथा निलिफा सुब्बा निर्वाचित हुईं । और पहली बार लेखा समिति में रञ्जना पौडेल निर्वाचित हुईं । खुली प्रतिस्पर्धा से सुस्मा पौडेल निर्वाचत होने के बाद इस कार्य समिति में महिला पत्रकारों की संख्या ६ हो गई । अभी हर एक जिला में और प्रदेश में अनिवार्य महिला उपाध्यक्ष और महिला सदस्यों का प्रावधान रखने के पश्चात नेपाल पत्रकार महासंघ में महिला पत्रकार की उपस्थिति नीतिगत कुछ हद तक सुरक्षित हुआ । इसी कार्य समिति की महिला संयोजक अनिता विन्दु ने तीसरा महिला पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया । समग्र में नेपाल पत्रकार महासंघ के गरिमामय इतिहास के शुरुवाती दिनों में महिला पत्रकारों की उपस्थिति कम होने के बाद भी विगत की तुलना में अभी महिला पत्रकार की उपस्थिति में विगत के महिला पत्रकारों के नेतृत्व की परिपक्वता, उनकी क्षमता और महासंघ में महिलाओं की उपस्थिति की आवश्यकता को तत्कालीन नेतृत्व की समझदारी में लाने में अर्थपूर्ण योगदान किया है । विगत में राधा बुढाथोकी, निर्मला शर्मा, यशोदा तिम्सिना तथा अनिता विन्दु आदि के नेतृत्व कभी महिला पत्रकार सम्मेलन तो कभी महिला पत्रकार को व्यवसायिक क्षमता विकास आदि का तालिम देती आ रही हैं । महासंघ के नेतृत्व में महिला पत्रकारों की उपस्थिति के लिए हुई बैठकों में एजेण्डा प्रस्तुतीकरण सहजीकरण और सम्वोधन के लिए आवाज बुलन्द करने के कारण आज के दिन में नेपाल पत्रकार महासंघ में महिला पत्रकारों की उपस्थिति बढ रही है । महिला पत्रकार के हित और व्यवसायिक सुरक्षा आदि के लिए पत्रकार महासंघ में आकर्षण बढ़ा है । महिला पत्रकार के साथ प्रत्यक्ष सरोकार रखना, चाहे वह लैंगिक हिंसा का विषयवस्तु हो या महिला व्यवसायिक सुरक्षा के लिए आवश्यक भौतिक संरचना लगायत का अवयव, उसकी सुनिश्चतता के लिए महिला पत्रकार की उपस्थिति महासंघ में होना चाहिए यह सोच महिला पत्रकारों के बीच पनप रही है ।
विचारणीय पक्ष यह भी है कि नेपाल पत्रकार महासंघ की कार्य समिति आज भी महिला पत्रकार के नेतृत्व में राज्य द्वारा प्रदान किए गए ३३ प्रतिशत की अनिवार्य उपस्थिति को आत्मसात नहीं कर पाई है । कुल नेतृत्व में महिला पत्रकार का नेतृत्व १२ प्रतिशत रहना विगत के निरंकुश शासन व्यवस्था से लेकर लोकतान्त्रिक गणतन्त्र नेपाल के राज्य संयन्त्र में समेत महिला के नेतृत्व की सहभागिता के प्रति कुछ खास उदार नही दिख रहा है । जिला और प्रदेश में महिला उपाध्यक्ष की अनिवार्य प्रावधान रहने पर भी केन्द्र में अनिवार्य महिला उपाध्यक्ष की उपस्थिति के विषय में तत्कालीन विधान संशोधन समिति समेत गम्भीर दिखाई नहीं दे रही । उम्मीद है कि वर्तमान कार्य समिति आगामी दिन के विधान संशोधन में अनिवार्य महिला उपाध्यक्ष लगायत दलित, आदिवासी जनजाति तथा मधेसी एवं सीमान्तकृत वर्ग समुदाय के महिलाओं को अवश्य समेटने की कोशिश करेगी । पत्रकारिता समाज कल्याण के लिए भी है । समाज विकास समग्र राष्ट्र का सर्वाङ्गीण विकास उद्धेलित करता है और शान्ति तथा पुनःनिर्माण का आधारस्तम्भ सामाजिक सदभाव कायम करने का माध्यम भी बनता है । इसलिए पत्रकारिता क्षेत्र के नेतृत्व में रुपान्तरित समाज और राज्य की परिकल्पना अनुरुप का विधान बनाना वर्तमान कार्य समित की जिम्मेदारी बनती है । साभार ओनलाइन खबर , हिंदी अनुवाद : डा.श्वेता दीप्ति

 

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