एकोंम मोदी द्धितीयो नास्ति माेदी ही माेदी
व्यग्ंय लेख=============बिम्मी शर्मा
मोदी जी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारत में सिर्फ वही वह हैं बांकी दूसरा कोई नहीं । खुद ही नहीं जीते अपनी पार्टी भारतीय जनता पार्टी को भी भारी मत से जितवा कर त्राण करवा दिया । जैसे गंगा जी में नहा कर सभी के पाप धुल जाते हैं उसी तरह मोदी जी के नाम पर भाजपा से उठे उम्मीदवार सभी के पाप धुल कर वह सांसद बन गए । अब संसद पहुंच कर राज करेंगे। मोदी जी ने इनको गधा जन्म से मुक्ति दिलवा दी नहीं तो यह गधे या उल्लू ही बने रहते । एक मच्छर आदमी को हिजडा बना देता था पर अब एक मोदी जी ने तमाम नाकाम को अपने बलबुते पर निर्वाचन में बहुमत दिला कर ईंसान बना दिया और संसद भवन भी पहुंचा दिया । इसे कहते हैं वारे के न्यारे हो गए । मोदी जी ने अहं ब्रम्हास्मी अर्थात मैं ही ब्रम्ह हुं के तर्ज पर मैं ही भारत हुं का नारा क्या दिया सारे भारत वासी उनके दिवाने हो गए । सभी ने आंख मूंद कर उनको भारत मान लिया और चुनाव में उनके ही नाम पर ठप्पा लगा कर हर ऐरे गैरे को ऐसे जितवा दिया जैसे वह मोदीजी के एहसान उतार रहे हो । भगवे रंग ने सबको अपने रंग में ऐसे रंगा की बांकी सभी रंग फीके पड गए । तरबुजे को देख कर तरबुजा रंग बदलता है कि नहीं पता नहीं । पर मतदाताओं ने रंग बदल कर भाजपा का झण्डा संसद पर एक बार फिर से फहरा दिया । अब हर, हर महादेव हासिए पर चले गए और हर, हर मोदी का नारा चारों तरफ से बरसने लगा । महादेव भी मोदी के आगे फीके पड गए । बचपन में हम लोग जब बारिश नहीं होती थी तब हर, हर महादेव कह कर आसमान की ओर देखते हुए चिल्लाते थे । ठीक उसी तरह विकास की भूखी जनता हर, हर मोदी का नारा घनकाते हुए अपने क्षेत्र के विकास की जोरदार मांग करने लगे । अब मोदी कितना और कैसे विकास करेगें । यह तो सबने उनके पहले प्रधान मत्रीत्व काल में देख ही लिया है । अब उनके दूसरे प्रधान मंत्रीत्व काल में शायद भारत का विकास इतना ज्यादा हो जाएगा कि वह धरती में ही समा न पाएगा । शायद भारत को चन्द्रमा में कहीं शिफ्ट करना न पडे । क्योंकि यह पृथ्वी अब ज्यादा विकास का बोझ सह नहीं पाएगी इसी लिए । इसी लिए मोदी जी से अनुरोध है कि देश विकास से पहले अपना विकास करें । मोदी जी ने अपने पहले कार्यकाल में ९२ देशों का भ्रमण किया । इन ९२ देशों के राजनेता और जनता ने इनको अच्छी तरह से पहचाना । अब दूसरे कार्यकाल में बांकी बचे देशों का भ्रमण करेंगें और वहां अपनी जम कर पहचान बनवाएगें । इसी को कहते है पशुपति नाथ के दर्शन में मछली का व्यापार । देश का नाम भी कर दिया और खुद के भी घूमने का शौक पूरा कर लिया । आखिर घूमना किस को अच्छा नहीं लगता ? । वह भी देश का प्रतिनिधित्व करते हुए पूरे आन, बान, शान के साथ घूमने का मजा ही अलग है । मोदी जी तो धार्मिक और दयालू हैं कि अपने संसदीय क्षेत्र काशी हर महीने आते हैं । अभी चुनाव जीतने के बाद काशी बिश्वनाथ का दर्शन और यहां के मतदाताओं का धन्यवाद ज्ञापन करने के लिए फिर से पधारे हैं । कोई पांच साल में एक बार अपने संसदीय क्षेत्र का मुआयना करने नहीं जाते पर मोदी जी तो मोदी जी हैं साल में पांच बार काशी आ जाते है । बेचारे मोदी जी को हर समय काशी के विकास और यहां के जनता की याद इतनी सताती है कि आए दिन दौडे चले आते है । मतदाता भले ही उन से उब जाए पर मोदी जी अपने मतदाता से कभी नहीं उबते । भगवान कृष्ण अपने भक्त या मित्र सुदामा कि पुकार पर दौडे चले जाते थे। उसी तरह गरीब, दिनहीन की पुकार पर मोदी जी अपने सारे कामकाज छोड कर खीचें चले आते हैं । पिछले २० सालों मे मोदी जी ने एकदिन भी छुट्टी नहीं ली । काम और सिर्फ काम करते रहे । ईतना ज्यादा काम किया कि निर्वाचन के समय आचार संहिता लागू हो जाने के सभी चुपचाप अपने घरों में सिमट गए । पर मोदी जी उस समय भी केदारनाथ और बद्रीनाथ का दर्शन करने और गुफा में ध्यान और तपस्या करने चले गए । दर्शन का दर्शन हो गया, तपस्या का तपस्या भी हो गया और प्रचार भी हो गया । कुछ सुस्त पडे हिन्दू मतदाता उनके दर्शन और तपस्या से ईतने प्रभावित हो गए कि आनन, फानन में अपना निर्णय बदल लिया । मतदान किसी और पार्टी को करने वाले थे पर टेलिभिजन पर मोदी जी का लाईव तपस्या देखने के बाद आंख बंद कर के मोदी जी और भाजपा को मतदान कर दिया । इसे कहते वोट खींचने की कला जो मोदी जी बखुबी जानते हैं । मोदी जी बातों के जादूगर हैं वह ऐसी मीठी बातें करते हैं कि सामने वाला उन पर लट्टू हो कर टट्टू बन जाता है । अब जब टट्टू बन गए तो उस पर बिचारों की सवारी करवा कर वोट खींचना आसान हो जाता है । इसे कहते है हिप्नोटाईज या सम्मोहित करना । अब मोदी जी ने पूरे बिश्व को ही सम्मेहित कर दिया है । सारे भारत वासी टट्टू और बिश्व के सभी जन लट्टू हैं मोदी जी पर । हो भी क्यों न वहां जहां और जिस देश में जाते हैं वहीं की भाषा बोल कर सभी को अपनी उगंली पर नचा देते हैं । जब कोई नाचने लगे तो मोदी जी खूब ताली बजा कर अपनी तारीफ खुद करके या करवा के महफिल में समां बांध देते हैं । मोदी जी के शान में जीतने भी कसीदे कढें जाएं वह कम ही हैं । उनकी छांया से बादल भी शर्माता है । यदि मोदी जी न होते तो इस आधुनिक भारत का क्या होता ? न नोटबंदी होती, न जीएसटी लागू होता और न देश इतनी तरक्की करता ? नोटबंदी के कारण ही तो भारत की जनता को नए, नए नोट देखने को मिले । नहीं तो वही पुराने सडे, गले नोट से अपना आंसू पोंछते थे बेचारे । जीएसटी से छोटे, छोटे व्यापारी भले हासिए पर चले गए हो नए और बडे व्यापारियों को इससे फायदा ही हुआ न ? मोदी जी भारत के विध्न विनाशक और तारणहार है । मोदी न होते तो देश किसकी गोदी में बैठ कर ईतनी तरक्की करता । यह सारा जगत मोदी जी से ही प्रकाशित है । उन्ही से लय और क्षय दोनों शुरु होती है और खत्म होती है । “जले बिष्णु, थले बिष्णु, सर्व बिष्णु जगतमय” की तर्ज पर अब यह मोदी मंत्र सबको बोलना चाहिए । जैसे “जले मोदी, थले मोदी सर्व मोदी जगतमय ।”

