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१८ वर्षाें के बाद भी रहस्याें के साए में दबा राजदरबार हत्याकांड

२८ मई

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एक दुखद और रहस्यमयी हत्याकाण्ड हुए , १८ वर्ष बीत गए । ०५८ जेष्ठ १९ गते  की रात नेपाल के इतिहास की वो काली रात है जिसमें कई निर्दोष जान चली गई थी । उस काली रात का खुलासा आज तक नहीं हो पाया । अतीत के गर्भ में छुपे इस रहस्य के खुलने की भी कोई सम्भावना दिखाई नहीं देती । जानकार के अनुसार राजपरिवार के दस व्यक्तियों ने अपनी जान गँवाई थी पर सम्भावना इससे अधिक की है जिसका खुलासा ही नहीं हो पाया । तत्कालीन राजा वीरेन्द्र,रानी ऐश्वर्या, युवराज दीपेन्द्र, अधिराजकुमार जिराजन, अधिराजकुमारी श्रुति, शान्ति राज्यलक्ष्मी, शारदा राज्यलक्ष्मी, शहजादी जयन्ती राजलक्ष्मी,शाह कुमार खड्ग विक्रम शाह,धीरेन्द्र शाह आदि इस हत्याकाण्ड के शिकार हुए थे । नेपाल का इतिहास जब भी पलटा जाएगा तो इस मर्माहत कर देने वाली घटना लोगों को जरुर सोचने पर विवश करेगा कि आखिर इसके पीछे का राज क्या है ?Image result for image of raj darbar hatyakand

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उस रात की घटना अभी भी रहस्यमय बनी हुई है । वि. सं. २०५८ साल जेठ १९ की रात दरबार के भीतर हुई गोली काण्ड में राजा विरेन्द्र का वंश ही समाप्त हो गया । बहरहाल दरबार हत्याकाण्ड घटना के बाद तत्कालीन सरकार द्वारा गठित जाँच समिति ने जाँच पडताल के बाद तैयार किए गए प्रतिवेदन में कहा गया कि यह घटना तत्कालीन युवराज दीपेन्द्र द्वारा किया गया था उन्होंने ही इस कार्य को अंजाम दिया ।

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यद्यपि दीपेन्द्र ने अपनी प्रेमिका देवयानी राणा के साथ विवाह करने को परिवार से अनुमति न मिलने के आवेश में उक्त काण्ड करने की बाते अब तक की जा रही है । लेकिन अभी भी कई प्रश्न अनसुलझे है्र । कई तथ्य रहस्य बना हुआ है । उस से भी अधिक आज तक नेपाली जनता इस बात को मानने को कतई तैयार नही है कि उक्त काण्ड युवराज ने किया होगा ।
गौरतलब है– राजा के हत्या के बाद उन के छोटे भाई ज्ञानेन्द्र शाह का शासन प्रारम्भ हुआ । जनता की नजर में निरंकुश शासक ज्ञानेन्द्र के विरुद्ध जनआन्दोलन २०६२–६३ के सफलता के साथ ही ज्ञानेन्द्र का शासन पतन हुआ व नेपाल से राज संस्था का ही अन्त हो गया ।

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