आन्दोलनरत अस्थायी शिक्षकों का आक्रोश : राज्य हमारा मौलिक अधिकार छीन रही है
अंशु झा,काठमांडू | राज्य द्वारा लगभग १३००० कार्यरत अस्थाई शिक्षकों को विस्थापित कर दिया गया है । परिणामस्वरुप अस्थाई शिक्षक सरकार के नीति विरुद्ध सडक संघर्ष में है । संघर्षरत शिक्षकों में से २ लोग २०७६ साल २० गते से आमरण अनसन पर हैं । जिसमें दो महिलाएं हैं । वह हैं– तराई के पर्सा जिला निवासी नीतु सिंह और दुर्गम जिल्ला जुम्ला निवासी राधा राउत । शिक्षक महासंघ के सहयोग से बार बार वार्ता करने के बाबजुद भी समस्या यथावत है ।
अस्थाई करार शिक्षक समिति का केन्द्रीय उपाध्यक्ष गोपाल बस्नेत ने कहा कि हमारी तीन मांगें है । जो पूरा नहीं होने तक हमलोग आंदोलन जारी रखेंगे । आज आमरण अनसन का ४८ वें दिन है । अनसन पर बैठी महिलाओं का स्वास्थ्य स्थिति अत्यन्त गम्भीर हो चुकी है फिर भी सरकार इसे अभी तक अनसुनी कर रही है ।
आंदोलन परिचालन समिति का सह–संयोजक जीवन सुवाल ने कहा कि सरकार की इस अव्यवस्थित नीति के कारण हमलोग बहुत दुखी हैं । राष्ट्र का नारा समृद्ध नेपाल और सुखी नेपाली है परन्तु हमलोगों को नौकरीविहीन बना दिया है ।
पीडित शिक्षिका भगवती न्यौपाने ने कहा कि अब हमारी अवकाश में कुछ ही दिन बांकी रहा था । इज्जत के साथ अवकाश प्राप्त करने बजाय अयोग्य सावित कर भगाया जा रहा है ।
दूसरी पीडित शिक्षिका ने कहा कि २० वर्ष जब हमने कार्य किया तब अयोग्य नहीं थे । जब हमने विद्यालय के बच्चों को काविल बनाया तब अयोग्य नहीं थे । अब जब हमारी अवकाश का समय आ गया तब हम अयोग्य हो गये ? सरकार हमारे साथ गलत व्यवहार कर रही है । हमारे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा रही है । जो कि यह लोकतन्त्र का परिभाषा नहीं है ।
पुनरुत्थानवादी शक्ति नेपाल का अध्यक्ष शेखरजंग रायमाझी ने भी आंदोलित शिक्षकों के साथ ऐक्येबद्धता जनाया है । उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी इन पीडित शिक्षकों के साथ है । इन लोगों को इनका अधिकार मिलना चाहिये इन्होंने २५–२५ वर्षों तक उच्च स्तर पर अपना कार्य निर्वाह किया है । देश के भविष्य को संवारा है । और अभी सरकार इन्हें अयोग्य सावित कर रही है जो की अत्यन्त दुखद है ।
पुनरुत्थानवादी शक्ति नेपाल के प्रवक्ता तथा कानूनविद् शरद मिश्र ने कहा कि हमारी सहयोग इन पीडित शिक्षकों के लिये जारी रहेगी । इसी अषाढ १८ गते सर्वोच्च द्वारा शिक्षकों के मुद्दा का फैसला किया जायेगा । आशा है फैसला साकारात्मक हो ।


