बादल
व्यग्ंय……………….बिम्मी शर्मा
माैनसून आगाज कर चुका है । बरसात का मौसम शुरु हो गया है । देश भर काले बादल मडंरा रहे हैं । देश के राजनीति में भी पिछले कुछ वर्षों से काला बादल मडंरा रहा है । जो गरजता तो जोरों से है पर बरसता नहीं । यह बादल गृह मंत्रालय को काले नाग की तरह घेर कर बैठा है । इस बादल के कारण पूरे देश में अम्लीय वर्षा की तरह कुशासन की बारिश हो रही है । देश के नियम कानून को तोड, मरोड कर यह काला बादल अपनी मनमानी कर रहा है । बादल है ईसी लिए किसी किसी की सुनता नहीं बस गडगडाता रहता है थोथा चना बाजे घना की तरह । लोग परेशान है सब चाहते है यह बादल गृह मंत्रालय से हटे तो देश में अमन चैन आ जाए पर बादल चट्टान की तरह टस से मस नहीं होता । बस दोहरे प्रहरी भिडंत के बहाने से अपने दुश्मनों का खात्मा कर मन की मुराद पूरी कर रहा है । आखिर में जगंली राज से अचानक शहर में प्रकट हुआ बादल है मनमानी तो करेगा ही । दस साल तक जगंल में भूमिगत रुप से अपना राज चलाने के बाद यह बादल शहर और सिंह दरवार मे देखा गया । जब जगंल में था तब दुश्मन सेना से लोहा लेने का काम यही बादल करता था । उस समय जगंल में यह कमांडर था अपनी फौज का । उसी का हैगं ओवर अभी तक नहीं गया है शायद ईस लिए नेपाल पुलिस को भी इसने अपनी भूमिगत सेना के माफिक समझ कर चला रहा है या प्रयोग कर रहा है । पुलिस तो वैसे भी मोटे दिमाग के होते हैं । जिसके कंधे पर बंदुक रख कर चलाने के लिए आदेश दिया जाएगा उसी पर रख कर चला देगें । पुलिस तो मूढ बुद्धि की है पर गृह मंत्रालय का कमांडर तो बेवकूफ नहीं है । मूढ लोगों पर ही तो चलाख लोग राज करते है । यह काला बादल भी वही कर रहा है । लोगों को इस बादल से बहुत उम्मीद थी पर अब सब नाउम्मीद हो गए हैं । सभी को लगता था कि जब यह बादल गृह मंत्रालय के आसमान को घेर कर बैठ गया तो जरुर समृद्धि और सुशासन की वर्षा होगी । खेत में फसल की तरह समृद्ध सभी के घरों में लहलहाने लगेगी । पर नहीं हुआ सब उल्टा । यह काले बादल तो नीति नियम को ही ताक पर रख कर अपने मन माफिक कर रहा है । इसी बादल के कारण निर्मला पंत का बलात्कारी और हत्यारे को पक्डा नहीं जा सका । एक साल होने को आया निर्मला का अपराधी छुप कर मजे से बैठा है । पुलिस उसका बाल भी बांका नहीं कर सकी । आखिर में इस काले बादल ने उस बलात्कारी को अपने आगोश में जो छुपा कर रखा हुआ है । मीडिया और मानव अधिकार कर्मी कौवे की तरह काँव, काँव करते रहे आसमान में मडंराते रहे पर इस काले बादल का ह्दय न पिघला । इस बादल के पास दिल होता तब न पसीजता ? आखिर में बादल जो ठहरा एक जगह कंही टिकता नहीं हवा के कारण उड कर चला भी जाएगा । यह बादल दिखने में बहुत ही सभ्य और सफेद है ज्यादा बोलता या गडगड भी नहीं करता है । पर बिना बोले ही अपने आकाओं के खेत में काले बादल बन कर जोर से बरस जाता है और किसी को पता भी नहीं चलता । मीडिया से भी दूर ही रहता है पर अपने कारस्तानी को ऐसे अंजाम देता है कि मीडिया लकीर ही पीटती रह जाती है पर सांप को पकड नहीं पाती । यह बादल रुई की तरह हल्का नहीं बल्कि नमक की तरह वजनी है । जहां भी जाता है यह बादल अपना वजन दिखा देता है । यह बादल बोल कर नहीं कर के अपने अंजामों को बंया करता है । सब इसको आसमान में ढुंढते है पर यह धरती में छुपा रहता है और धरती के अपने हिमायतियों को सिंचित कर के फुर्र से उड जाता है । इस काले बादल के आका खुद भी प्रचंड आवेग से गरजते और बरसते थे कभी । पर अब पोखर की भांति शांत हो गए है । क्योंकि उनके किसी काले बादल ने पोखर पर जम कर बारिश जो कर दी है । इसी लिए अभी हवा महल बनाने के मुहावरों के कारण अभी हासिए पर चले गए है । आना तो यह भी लाईम लाईट में ही चाहते हैं । पर क्या करें मुहावरों का जखिरन इनके पास जो नहीं है । देश पिछले कुछ सालों से हवा, हवाई के किस्सो पर ही उड रहा है । किसी दिन देश जब धडाम से गिरेगा तब सारे मुहावरे बेलुन कि तरह फूट कर शासन सत्ता की पोल खोल देगें । देश का शासन सत्ता और भत्ता पर टिकी है । जब तक सिहं दरवार, बालुवाटार के हनुमान और नंदी भृंगी को सत्ता से भत्ता की चाशनी चाटने को मिलती रहेगी तब तक यह काला बादल भी गृह मंत्रालय के आसमान पर पूरे गरज और बरस के साथ चंदुए कि तरह टिका रहेगा । भले ही हवा के थपेडो से यह हिलता रहेगा पर गिरेगा नहीं । देश के आसमान में सिंह दरवार कि तरह इस बादल के आकाओं ने कब्जा जो कर रखा है । इस नियम, कानून को अपने मन मुताविक चलाने वाले बादल से सभी चिढे हुए हैं । पर सभी डरते भी इस से । क्योंकि सभी को इस काले बादल का विगत मालुम है । खून की होली खेल कर धरती और आसमान दोनों को लाल कर चुका यह बादल लाल से काला हुआ है । भले ही इसके नाम के आगे राम का नाम जुडा हो पर है यह रावण ही । रावण तो विद्धान था यह भी विद्धान है पर रणनीति और युद्ध कौशल का । यह एक लडाकु बादल है रावण से कंश या जरासंध बन जाएगा पर राम कभी नहीं बनेगा । क्योंकि इस ने बाल्मीकि की कहानी नहीं पढी है जो रत्नाकर डाकु से बडे ऋषि बन गए थे । बस यह बाला बादल है और गृह मंत्रालय का वह क्रुर आसमान है जहां से कभी, कभी खून और आंसू की भी बारिश हो जाती है । यह खून और आंसू उन निर्दोष और मासुम ईंसानों के है जो इस काले बादल के हठ और गरज के कारण वलि चढ गए थे । पर इस काले बाल को कोई फर्क नहीं पड्ता । क्यों कि यह बादल न तो कभी हंसता है और नहीं कभी रोता है या इसके आंख मे आंसू आते है । बस दूसरों को रुलाना और जम कर अपने मनचाही जगह पर बरसना ही इसकी फितरत है ।

