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प्रम ओली सरकार की संदिग्ध गतिविधियाँ क्या इशारा करती है ? : उपेन्द्र झा

उपेन्द्र झा, काठमांडू, ७ जुलाई २०१९ | शक्तिशाली सरकार के नाते प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली की जिम्मेवारी भी उतना ही अहम् है जितना बोइँग चलाने वाले पायलट का धरती पर सुरक्षित अवतरण । हवा में उडने वाले दो ही होते हैं– एक वो जो यथार्थ में उडते हैं, दुसरे वो जो कल्पना में उडान भरते हैं । देश को समृद्ध और जनताको सुखी बनाने की गहन जिम्मेवारी ग्रहण कर प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली कल्पना की उडान में इस कदर मशगुल हैं कि लगता है इसके सहारे ही देश को विकसित करवायेंगे । जलमार्ग सुनिश्चित कर पानी जहाज से नेपाली जनता को दुनियाँ का सैर करवाना, पहाडों की उचाई और डरावना गहरी खाई से रेलमार्ग निर्माण करवाना ये उनकी उँची उडान है ।
नेपाल की अविकसित नेपाली जनता ने देश विकास के लिये आन्दोलन के मार्फत एक से एक बेहतरिन सरकार बना कर दिया, किन्तु कोई सरकार कमजोर होकर विकास नहीं कर पाई तो कोई शक्तिशाली होकर उठ नहीं पा रही है । देश विकास का कार्य धरा का धरा पडा है और प्रधानमन्त्री जी कल्पना की उँची उडान पर हैं । सरकार के डेढ वर्ष के कार्यकाल में जन अपेक्षा के सवाल पर, देश विकास की योजनाओं पर सरकारका काम कछुवे जैसा दिखाई पड रहा हैं । किन्तु सरकारी निकाय को सुधारने के नाम पर कानून बना कर नियन्त्रण करने हेतु संसद में लाये गये प्रस्ताव के विरुद्ध सडक पर आन्दोलन का सिलसिला शुरु हो गया ।
गुठी विधेयक के विरोध में सडक पर आए जन लहर का नजारा विगत के जन आन्दोलन की याद दिला रही है। आन्दोलन विस्फोटक न बन जाय सरकार ने अविलम्ब गुठी विधेयक वापस लेकर पिछे हट गयी । मीडिया विधेयक का भी कुछ ऐसा ही हाल है । मीडियाकमीै का दिनानुदिन बढते विरोध कार्यक्रम को निस्तेज करने के लिये सरकार ने विधेयक वापस तो नहीं लिया, किन्तु आन्दोलनकारी को विधेयक संशोधन का आश्वासन जरुर मिला है। त्रिभुवन विश्व विद्यालय, मानव अधिकार आयोग आदि पर नियन्त्रण शिकञ्जा कसने हेतु कानुन बनाने का प्रयास जारी है ।
भारतीय फलफुल तरकारी में प्रयोग हुवे बिषादी नियन्त्रण करने हेतु सीमा नाका में सात दिनों से रोक कर प्रयोगशाला द्वारा जाँच करवाने की सरकारी फरमान अन्ततः साधन स्रोत के अभाव में टाँय टाँय फीस हो गया । रोकने का कारण पुछने पर नेपाली नागरिक का बिषादी से जान बचाना सरकार की हैसियत से मेरी जिम्मेवारी है ऐसा कहा गया । लेकिन सात दिनों से ४२ डिग्री तापक्रम में सयकडौं मालवाहक वाहन में फलफुल, तरकारी सड जाने के बाद जाँच का साधन न होने के कारण सबको अब निर्वाध भितर प्रवेश करने की अनुमति देकर सरकार पीछे हट गयी ।
नेपाल में आइफा अवार्ड आयोजना करने वाली भारत की कम्पनी वीजक्राफ्ट्स नेपाल सरकार को सहकार्य करने के लिये बिना शर्त आमन्त्रित करने का कोई तुक नहीं था । ५० करोड सहयोग करने के सिवाय नेपाल को आइफा में कुछ भी करने का बन्देज लगाया हुआ सम्झौता पत्र देखकर बुद्धिजीवियों में व्यापक विरोध हुआ और सरकार को पीछे हटना पडा ।
बेतुकी बातों से लोगों का मनोरंजन करना केपी शर्मा ओली का स्वभाव है । किन्तु प्रधानमन्त्री के रुप में जिम्मेवारी पाने के बाद यह हास्य चरित्र निश्चय ही प्रधानमन्त्री के गरिमा को क्षीण बनाता है । किन्तु इस प्रहसन में कोई कटौती नहीं दिखता । इनके कार्यकाल में काठमाण्डू प्रदूषण मुक्त हो गया है । अब लोग यहाँ मास्क लगा कर नहीं चलते हैं । ऐसा कहकर उन्होंने लोगों के साथ ऐसा बेतुका मजाक किया है कि लोगों में प्रधानमन्त्री का विश्वास बिल्कुल उठता जा रहा है ।
अपने अर्थहीन कार्यों से लोगों को आन्दोलित करना फिर पीछे हट जाना, अनावश्यक कार्योंं में ध्यान जाना ये सब कुछ संदिग्ध बातें हैं जिसको प्रधानमन्त्री जी बडे चाव के साथ करना चाह रहे हैं । बाहर के लोगों में ही नहीं अपने पार्टी भीतर के सहकर्मी भी विरोध में जाने की बात अर्थहीन नहीं है । यूँ भी आन्दोलन न उठा तो अपने क्रियाकलाप से भी आन्दोलन उठाने का सरकार का अव्यक्त मन्शा निश्चय ही किसी तरफ ईशारा करता है ।

 

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