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संबिधानसभा को पुर्नस्थापना करके संबिधान नहीं बनायी जा सकती : पूर्व प्रधानन्यायाधीश

 

१२ कात्तिक, काठमाण्डू। पूर्व प्रधानन्यायाधीश का एक समुह ने संबिधानसभा को पुर्नस्थापना करके संबिधान नहीं बनायी जा सकती ऐसा  सुझाव दिया है ।
प्रधानमन्त्री डा. बाबुराम भट्टराई के साथ सामूहिक भटघाट मे पूर्व प्रधानन्यायाधीश के इक समुह ने नया निर्वाचन से निर्वाचित संबिधानसभा ही नया संबिधान बनाने के लिये अपना सुझाव दिया है ।  भेटघाट मे सहभागी सरकार के कानुनी सल्लाहकार महान्यायाधीवक्ता मुक्ति प्रधान के अनुसार संबिधान जारी करने के लिये नही लेकिन नया चुनाव मे जाने के लिये अथवा चुनाव की तिथि निर्धारित करने के लिये जो बाधायें हैं उसे हटाने के लिये संसद की पुर्नस्थापना की जा सकती है  पूर्व प्रधानन्यायाधीशों ने ऐसा सुझाव दिया है ।

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वर्तमान स्थिति मे सभी समस्या का समाधान संबैधानिक हिसाव से नही होकर राजनीतिक सहमति ही एक मुख्य उपाय है लेकिन राजनीतिक सहमति करते समय संबैधानिक प्रकृया नजरअन्दाज न करने की सलाह इनलोगों ने दिया । पुर्नस्थापित संबिधानसभा व्दारा संबिधान जारी करने पर सर्वोच्चको आदेश को चुनौती माना जा सकता है तथा इससे अदालत असन्तुष्ट होने की संभावना है । भेटघाट मे केशवराज उपाध्याय, हरिप्रसाद शर्मा, त्रिलोकप्रताप राणा, ओमभक्त श्रेष्ठ और अनुपराज शर्मा सहभागी थे ।

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उनलोगों ने निर्वाचन आयोग तथा अन्य संबैधानिक निकाय मे नियुक्ति सम्बन्धित कानुनी जटिलता को हटाने के लिये मात्र संसद की पुर्नस्थापना करने का सुझाव दिया है । संबिधानसभा ही संबिधान जारी हो सकता है तथा इसके लिये नयाँ संबिधानसभा का चुनाव मे ही जाने की सलाह पूर्व प्रधानन्यायाधीशों ने दिया है ।

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