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पुर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के निधन से देश विदेश में शोक की लहर

 

_हिमालिनी के लिए भारत से मधुरेश प्रियदर्शी की रिपोर्ट…._नई दिल्ली/भारत — भारतीय लोकतंत्र ने आज अपने लोकप्रिय जननेता अरुण जेटली को खो दिया. भाजपा के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का आज दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया. अरुण जेटली को मोदी सरकार के प्रमुख रणनीतिकार और ताकतवर नेताओं में से एक माना जाता था. पूर्व वित्त मंत्री ने शनिवार की दोपहर 12.07 बजे राजधानी दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली. तबियत खराब होने पर जेटली को 9 अगस्त को एम्स में भर्ती कराया गया था. पंद्रह दिनों तक विशेषज्ञों की देखरेख में आईसीयू-वेंटीलेटर पर उनका उपचार चला. लेकिन पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली की तबियत में सुधार नहीं हुआ. आखिरकार 67 वर्षीय अरूण जेटली को नहीं बचाया जा सका.

निधन के बाद शोक की लहर…….

भाजपा के इस कद्दावर नेता के निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है. अरूण जेटली के निधन की खबर मिलते ही केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपना हैदराबाद दौरा बीच में छोड़कर नई दिल्ली लौट रहे हैं. पूर्व वित्त मंत्री के निधन पर संवेदनाओं का तांता लगा हुआ है। राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद, पीएम नरेंद्र मोदी, कैबिनेट के सभी मंत्री, कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी, पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह, बिहार के सीएम नीतीश कुमार सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने जेटली के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है.

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प्रधानमंत्री पहुंचे थे स्वास्थ्य जानने…..

पूर्व वित्त मंत्री का स्वास्थ्य जानने खुद प्रधानमंत्री एम्स पहुंचे थे. 9 अगस्त को जेटली के एम्स में भर्ती होने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई शीर्ष नेता उनके स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए पहुंचे थे. लेकिन लंबे उपचार के बावजूद तबियत में कोई सुधार नहीं हुआ.

छात्र नेता से वित्तमंत्री बनने तक का जेटली का राजनैतिक सफर……

नाम- अरुण जेटली

पिता का नाम- महाराज किशन जेटली
माता का नाम- रतन प्रभा जेटली

जन्म- 28 दिसंबर 1952 (नई दिल्ली)

राजनीतिक पार्टी- भाजपा

शिक्षा- एलएलबी (श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स), बी. कॉम (यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली)

दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन

निवासी – नई दिल्ली

भाजपा के वरीय नेता व पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली वकीलों के परिवार वाली पृष्ठभूमि से आते हैं.जेटली ने दिल्ली के राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की.इसके अलावा दिल्ली यूनिवर्सिटी से उन्होंने लॉ में ग्रेजुएशन किया था. छात्र जीवन में वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष भी रह चुके थे.

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आपातकाल में गए जेल……

राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान उन्हें जेल में भी रहना पड़ा था. यहां उनकी मुलाकात भारतीय जनसंघ के कई नेताओं से हुई थी. जेल से बाहर निकलने के बाद जेटली जनसंघ से जुड़े और एबीवीपी की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष बने. इसके अलावा एबीवीपी के राष्ट्रीय सचिव भी बने.

युवाओं का जीता भरोसा…..

वर्ष 1980 में भाजपा के गठन के बाद उन्हें यूथ विंग का अध्यक्ष बनाया गया. अस्सी के दशक में भाजपा खुद को स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही थी. इसके लिए अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी संघर्ष कर रहे थे. इन दोनों नेताओं ने जेटली को युवाओं को अपने भरोसे में लेने की जिम्मा सौंपा.

अटल सरकार में मिला जिम्मा…..

वर्ष 1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केन्द्र में सरकार बनी तो उन्हें कानून एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी मिली. उन्हें मात्र एक साल के अंदर केंद्रीय कैबिनेट में स्थान दिया गया.

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सुप्रीम कोर्ट में की वकालत…

जेटली ने सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी की. इसके बाद वह देशभर में जाने-माने वकीलों में से एक बन गए. उन्होंने साल 2009 में कोर्ट की प्रैक्टिस छोड़ी.

अटल बिहारी वाजपेयी के भरोसेमंद…..

अटल बिहार वाजपेयी ने जब राजनीति से सन्यास लिया तो भाजपा की रणनीति का जिम्मा उन्होंने पूरा किया. वर्ष 2009 में जेटली राज्यसभा में रहे. इस दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाई.

भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार की भूमिका…..

साल 2014 में नरेंद्र मोदी ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई इसके पीछे अरूण जेटली मुख्य रणनीति बनाने वालों में से एक थे. साल 2014 में खुद भी चुनाव लड़ा लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार अमरिंदर से हार गए. जेटली ने केंद्र की पहली मोदी सरकार में वित्त एवं कॉरपोरेट जैसे अहम मंत्रालयों का जिम्मा भी संभाला.

नोटबंदी के लिए किये जायेंगे याद…..

स्वास्थ्य कारणों से पीएम मोदी के नेतृत्व वाली दूसरी सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेवारियों से अपने आप को अलग करने वाले वरीय भाजपा नेता अरुण जेटली केन्द्र सरकार के नोटबंदी जैसे ऐतिहासिक फैसले के लिए हमेशा याद किए जायेंगे.

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