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मानवाधिकार आयोग से केपी शर्मा ओली ने जेनजी (Gen Z) आंदोलन की रिपोर्ट मांग की

 

काठमांडू, 27 जून । नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग’ (NHRC) से जेनजी (Gen Z) आंदोलन की घटना से जुड़ी जांच रिपोर्ट, आयोग के फैसले और उससे संबंधित सभी दस्तावेजों को उपलब्ध कराने की मांग की है। ओली की ओर से एमाले नेता महेश बर्तौला ने मानवाधिकार आयोग के सचिव से मुलाकात कर इस संबंध में एक चार सूत्रीय निवेदन पत्र सौंपा।

समाचार के अनुसार, ओली ने अपनी याचिका में भदौ 23 और 24 (अगस्त-सितंबर के दौरान) को हुए प्रदर्शनों, उसके बाद हुई आगजनी, तोड़फोड़, लूटपाट और सरकारी संरचनाओं पर हुए हमलों की घटनाओं के संबंध में आयोग द्वारा की गई जांच की पूरी रिपोर्ट मांगी है।

निवेदन पत्र में शामिल मुख्य बिंदु:

1. बच्चों को ‘मानव ढाल’ बनाने और अराजकता फैलाने का आरोप:
याचिका में कहा गया है कि २०८२ भदौ २३ गते (नेपाली कैलेंडर के अनुसार पिछले वर्ष) प्रदर्शनकारियों ने स्कूली बच्चों को ‘मानव ढाल’ (Human Shield) बनाकर संसद भवन पर हमला करने, पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने और अराजकता फैलाकर पुलिसकर्मियों की जान जोखिम में डालने का काम किया था। इसके बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा की गई कानूनी कार्रवाई में मानवीय क्षति हुई थी। इसके अगले दिन यानी २४ गते देश भर में आतंक फैलाकर विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, सुरक्षा निकायों के भवनों, राजनीतिक दलों के कार्यालयों, संचार माध्यमों और नेताओं के निजी घरों में आगजनी व लूटपाट की गई थी। इस मामले में मानवाधिकार आयोग द्वारा की गई जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

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2. आयोग के फैसले पर असंतोष और हैरानी:
ओली ने आयोग की बैठक नंबर १७७ में लिए गए निर्णय पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया में आई खबरों के अनुसार, आयोग की सिफारिशें उसके तथ्यों से मेल नहीं खाती हैं। ओली का कहना है कि एक तरफ आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री के रूप में उनका (ओली का) कार्य कानून के खिलाफ नहीं था, लेकिन दूसरी तरफ जो लोग घटना में शामिल नहीं थे और जिन्होंने कानून नहीं तोड़ा, उनके खिलाफ पूर्वव्यापी कानून (Retrospective Law) बनाकर कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है। ओली ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि आगजनी करने और राज्य व्यवस्था पर कब्जा करने की कोशिश करने वाले मुख्य दोषियों पर आयोग का फैसला पूरी तरह मौन है।

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3. प्रत्यक्ष असर और सूचना पाने का अधिकार:**
ओली का कहना है कि आयोग द्वारा संविधान और कानून के विपरीत की गई इस सिफारिश से उन पर सीधा असर पड़ा है। इसलिए यह जानने का उन्हें पूरा अधिकार है कि आयोग किस आधार और किन सबूतों के दम पर इस निष्कर्ष पर पहुंचा है। उन्होंने नाराजगी जताई कि उनके खिलाफ लांछन लगाने वाले इस फैसले को आए हुए लगभग ३० दिन होने वाले हैं, लेकिन आयोग ने अभी तक उन्हें इसकी कोई आधिकारिक (Formal) जानकारी नहीं दी है।

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ओली द्वारा आयोग से मांगे गए मुख्य दस्तावेज:

* आयोग की बैठक संख्या १७७ के फैसले की प्रमाणित प्रतिलिपि (Certified Copy)।
* आयोग की सदस्य लिली थापा के नेतृत्व में गठित समिति द्वारा सौंपी गई मूल जांच रिपोर्ट की कॉपी।
* रिपोर्ट में से कौन सा हिस्सा हटाया गया या जोड़ा गया, और ऐसा बदलाव करने की क्या वजह थी, उसकी पूरी जानकारी।
* इस घटना के संबंध में दर्ज किए गए सभी बयान और इकट्ठे किए गए दस्तावेजों की प्रतियां।

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