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ओली सरकार की भारत से सम्बन्ध बिगाड़ने की एक और साजिस : पंकज दास

 

काठमांडू । नेपाल के प्रधानमंत्री के तरफ से एक बार फिर एक खबर को प्लांटेड किया गया है। नेपाल के संविधान दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रमुख अतिथि के रूप निमंत्रण भेजा गया है।

इस खबर के पीछे नेपाल के कम्यूनिष्ट सरकार की सोची समझी साज़िश है। इस खबर को फैलाकर एक बार फिर भारत के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक संबंध को और अधिक खराब करने की साज़िश है।

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हर मोर्चे पर असफल होने के बाद ओली सरकार के पास अब एक ही अस्त्र है भारत विरूद्ध राष्ट्रवाद का। इसलिए इसको भुनाने के अलावा अब कोई रास्ता नहीं है। यही वजह है कि संविधान दिवस के दिन मोदी को नेपाल बुलाने की खबर फैलाई जा रही है।

यह इसलिए किया गया है क्योंकि अगर मोदी संविधान दिवस के दिन आते हैं तो इसे ओली सरकार अपनी बडी जीत के रूप में प्रचारित करेगी और अगर नहीं आए तो इसको भारत विरोधी राष्ट्रवाद के रूप में अपनी छवि चमकाएगी।

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वैसे यहां यह बताना जरुरी है कि प्रधानमंत्री मोदी १९ सितम्बर से ३० सितम्बर तक १० दिनों के अमेरिकी यात्रा पर रहने वाले हैं। १९ को रवानगी है। २२ को ह्यूस्टन में एक बहुत बड़ी सभा को संबोधित करने वाले हैं और २९ को UN साधारण सभा में संबोधन होना है।

वैसे भी नेपाल के संविधान को लेकर भारत का रूख बहुत ही स्पष्ट है। जब तक संविधान में नेपाल के सभी पक्षों को समेटा नहीं जाएगा तब तक उस संविधान का स्वागत नहीं हो सकता है।

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