२८ सेप्टेम्बर अन्तर्राष्ट्रीय रेबिज दिवस, आखिर यह दिवस क्याें मनाया जाता है ?
मनोज बनैता, सिरहा, २८ सेप्टेम्बर ।

विश्व रेबीज दिवस प्रतिवर्ष 28 सितंबर को मनाया जाता है । यह एक अंतरराष्ट्रीय अभियान है जो ग्लोबल एलायंस फॉर रेबिस कंट्रोल नामक गैर-लाभकारी संगठन के द्वारा समन्वित किया जाता है । प्रथम विश्व रेबीज दिवस वर्ष 2007 के सितम्बर माह में आयोजित किया गया था । यह रेबीज के प्रसार को नियंत्रित करने, रोकथाम और जागरूकता प्रसारित करने के प्रति समर्पित दिवस है । यह रेबीज के खिलाफ़ होने वाली लड़ाई में विश्व को एकजुट करने का सकारात्मक प्रयास है । विदित हो 28 सितम्बर लुई पाश्चर की पुण्य तिथि जिन्होंने पहली प्रभावी रेबीज वैक्सीन को विकसित किया था । रेबीज के बारे में रेबीज एक घातक बीमारी है, जो कि मानव मस्तिष्क को प्रभावित करती है तथा प्रतिवर्ष होने वाली हजारों मौतों का कारण भी बनती है । विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, एशिया और अफ्रीका में होने वाली 95 प्रतिशत से अधिक लोगों की मृत्यु के कारणों में रेबीज को पाया गया हैं । बच्चे कुत्ते के काटने के प्रति अतिसंवेदनशील होते हैं, इसलिए उन्हें रेबीज से संक्रमित होने का ख़तरा अधिक होता है । यह अनुमान लगाया गया है, कि पंद्रह वर्ष की आयु से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु में से दस में चार की मृत्यु रेबीस के कारण होती हैं । रेबीज लायसावायरस के कारण होने वाला वायरल रोग है । यह वायरस घाव व खरोंच या संक्रमित जानवर की श्लैष्मिक (जैसे कि काटने) के सीधे संपर्क में आने के माध्यम से पशुओं द्वारा मनुष्यों में फैलता है. यह चोट व घाव या मानव शरीर की सतह छुने के माध्यम से नहीं फैलता हैं। यह वायरस, मानव त्वचा या मांसपेशियों के संपर्क में आने के बाद रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क की ओर प्रसारित हो जाता हैं । इस वायरस के मस्तिष्क में पहुँचने के बाद, इसके लक्षण और संकेत संक्रमित व्यक्ति में दिखाई देने लगते हैं ।

