Tue. Sep 1st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

राष्ट्रपति का बिकल्पः ‘कु’ करें या पीछे हटें : कानुनविद्द

 

२४, मंसिर, काठमाडू । सहमति कि सरकार गठन करने के लिये राष्ट्रपति व्दारा तिसरि बार देये गये समयसीमा भी अब समसप्त होने जा रहा है । दलों व्दारा लिया गया अपना अपना  अडान यथावत है । एक दुसरे के विरध्द आरोप प्रत्यारोप मे कोइ कमी नही आइ है ।

अगर बुधबार तक सहमति नही हुइ तो मन्त्रिपरिषद् विस्तार करकर आगे बढ्ने की सत्तारुढ गठवन्धन के निर्णय से विपक्षी दल कुछ ज्यादा आक्रोशित दिख रहें हैं ।। तत्काल सहमति जुट्ने की कोइ सम्भावना नही दिखती। ऐसी अवस्था मे अब राष्ट्रपति के पास क्या विकल्प है ? कानुन बिशेसज्ञों के अनुसार अब राष्ट्रपति को आगे बढ्ने का कोइ जगह नही है । अनलाइनखबर को इस सम्बन्ध मे कुछ कानुनी बिशेशज्ञों  इसतरह का राय दिया हैं ।
विपिन अधिकारी, संविधानविद्

-राष्ट्रपति ने सहमति के लिये अन्तरिम संविधान के धारा ३८ का उपधारा १ अनुसार सरकार गठन की ओर एक प्रक्रिया सुरु किया था ।उन्होने उसका निरन्तारता भी दिया । लेकिन अब सहमति नही हो सकी तो राष्ट्रपति पिछे हटने के सिवा और कोइ विकल्प नही है । उनके अनुसार अब प्रधानमन्त्री बाबुराम भट्टराई के नेतृत्व को वर्तमान सरकार को ही बृहत स्वरुप देने के लिये आहृवान करना चहिये । जहाँतक ३८ के २ अनुसार बहुमतीय सरकार गठन के लिये आहृवान करने की विपक्षीयों की माग है, वह उनलोगों की केव सत्तामुखी बात है । उनको ३८ के २ मे जाने कि अवस्था नही है ।अगर वैसा हुआ तो वह उनका  पदीय मर्यादा के विपरित काम होगा । क्यंकि सरकार का गठन दलों का काम है, उनका नही हैन ।

यह भी पढें   अर्थमंत्री स्वर्णिम वाग्ले के अनुमान पर राकेश मिश्रा का गम्भीर सवाल, कहा-‘पहले लोगों को बचाइए, पुनर्निर्माण का बिल बाद में बनाइए’

भीमार्जुन आचार्य, संविधानविद्

-राष्ट्रपति के पास अब सिमित विकल्प है । दलों मे सहमति नही हुइ तो वे दल से बाहर के व्यक्ति को प्रधानमन्त्री बना सकते हैं । लेकिन इसे दलों व्दारा स्वीकार करना पडेगा जिसकि सम्भावना अन्त्यन्त कम है । दुसरा विकल्प यही सरकार की निरन्तरता है । ऐसी अवस्था मे राष्ट्रपति का कदम असफल होगा और वे कहें या न कहें बाबुराम की सरकार को विस्तार करके आगे बढने की अवस्था आ जायेगी ।

यह भी पढें   तबाही पर चीन का 'डबल गेम': चीनी विदेश मंत्रालय ने नेपाल पर ही मढ़ा दोष, ड्रैगन द्वारा विरोधाभासी बयान?

राधेश्याम अधिकारी, अधिवक्ता

-बुधबार तक सहमति नही जुटने पर भी  राष्ट्रपति को निरन्तरता देने कर सिवा और कोइ विकल्प नही है ।  संविधान सभा भंग होने के पश्चात उससे संवन्धित सभी विषय अपांग हो चुकी है उन्होने सहमति के लिये सबसे नजदिक के धारा ३८ का १ को पकड कर आहृवान किया है ।उससे आगे जाने का अर्थात ३८ के २ अनुसार जाने का कोइ जगह नही है ।

रमन श्रेष्ठ, वार एशोशिएशन पूर्वमहासचिव

-यह गैरसंवैधानिक काम काम करने का परिणाम है । उनका अन्तरिम संविधान के धारा ३८ के उपधारा १ अनुसार आहृवान करना ही गलत था ।
उन्होने बात संवैधानिक करके काम गैरसंवैधानिक किया है। अब राष्ट्रपति के सामने जटिल अबस्था है । पहले सात दिन दियें, उसकेबाद ६ दिन दियें । यह ५ दिन, ४ दिन, ३ दिन, २ दिन होते होते १ दिन मे आ जायेगा और अन्त मे उनके पास कोइ समय नही रहेगा । इस अवस्था मे वे कुद वेबकुफ बन जायेंगे । ऐसी अवस्था मे उन्हे या तो पिछे लौटना पडेगा या फिर ज्ञानेन्द्र के तरह  शासन सत्ता हात मे लेकर किसी को भी टिका लगाकर ‘प्रधानमन्त्री बना सकते हैं । केवल यही है उनका रास्ता ।

यह भी पढें   रसुवा बाढ़: 1600 बच्चों की जान बचाने वाले प्रिंसिपल से मिले भारतीय राजदूत श्री नवीन श्रीवास्तव, स्कूल के पुनर्निर्माण का दिया आश्वासन

प्रेमबहादुर खड्का, वार एशोशिएशनका अध्यक्ष

दलों व्दारा अगर सहमति नही हुइ तो राष्ट्रपति को स्वयं अग्रसर होना पडेगा । २७ गते तक सहमति नही हुइ तो सभी दलों को बोलाकर सहमति करने को कहना पडेगा अगर नहि हुइ तो जिसका बहुमत है उसिकी सिफारिस मे प्रधानमन्त्री का चयन करना पडेगा । संविधान के संरक्षक के हैसियत से ठीक नियत से कदम उठाना पडेगा ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com