हिमस्खलन और बाढ़ से 16 लाख लोग प्रभावित, सरकार ने जारी की पहली स्थिति रिपोर्ट
1 week ago
16 भाद्र, काठमांडू।
नेपाल-चीन सीमा के पास 10 भाद्र को आए हिमस्खलन और उसके बाद भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ से करीब 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने मंगलवार को आपदा पर अपनी पहली आधिकारिक स्थिति रिपोर्ट जारी करते हुए यह जानकारी दी।
रिपोर्ट के अनुसार, रसुवा और नुवाकोट को अत्यधिक प्रभावित जिले घोषित किया गया है, जबकि धादिङ, गोरखा और चितवन को मध्यम रूप से प्रभावित जिलों की श्रेणी में रखा गया है।
अब तक 987 मौतों की पुष्टि, 3,916 लोग लापता
प्राधिकरण के मुताबिक बाढ़ और भूस्खलन में अब तक 987 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
सबसे अधिक मौतें चितवन में 321 दर्ज की गई हैं। इसके अलावा नवलपरासी पूर्व में 216, नवलपरासी पश्चिम में 170, नुवाकोट में 95, गोरखा में 65, धादिङ में 55, तनहुँ में 38 और रसुवा में 27 लोगों के शव बरामद किए गए हैं।
देश के 62 जिलों से कुल 3,916 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है। इनमें लगभग 62 प्रतिशत नेपाली नागरिक और घरेलू पर्यटक, 17 प्रतिशत सरकारी कर्मचारी तथा 15 प्रतिशत विदेशी नागरिक शामिल हैं।
11,814 लोगों का बचाव, विदेशी टीमें भी अभियान में शामिल
अब तक विभिन्न बचाव अभियानों के जरिए 11,814 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 253 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
हवाई मार्ग से 3,702 लोगों का रेस्क्यू किया गया है और इसके लिए 573 हेलिकॉप्टर एवं विमान उड़ानें संचालित की गईं।
बचाव अभियान में कुल 21,011 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिनमें:
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नेपाली सेना – 8,896
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नेपाल प्रहरी – 7,912
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सशस्त्र प्रहरी बल – 4,203
भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की अंतरराष्ट्रीय खोज एवं बचाव टीमें भी नेपाली सुरक्षा बलों के साथ संयुक्त अभियान चला रही हैं।
279 घायल अस्पतालों में पहुंचे
विभिन्न अस्पतालों में 279 घायलों का उपचार किया गया। इनमें 79 लोग अभी भी उपचाराधीन हैं, 168 लोगों को छुट्टी मिल चुकी है, जबकि 3 लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई।
नेपाली सेना ने प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त 2,740 लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रदान की हैं।
बाढ़ से पुल, सड़कें और संचार व्यवस्था तबाह
रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ में:
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41 पक्के पुल पूरी तरह बह गए।
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4 अन्य पुल क्षतिग्रस्त हुए।
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उपग्रह मानचित्रण के अनुसार भोटेकोशी-त्रिशूली कॉरिडोर में 4,689 भवन जोखिम वाले क्षेत्र में हैं।
नुवाकोट में प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 1,267 घर पूरी तरह और 1,253 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
रसुवा के गोसाइँकुण्ड और आमाछोदिङ्मो गांवपालिकाओं के 3,702 परिवारों के 14,461 लोग पिछले छह दिनों से सड़क, बिजली और संचार सेवाओं से कटे हुए हैं।
रसुवा के सभी प्रमुख राजमार्ग अनिश्चितकाल के लिए बंद हैं। उत्तरगया-5 स्थित त्रिशूली-मैलुङ-स्याफ्रुबेँसी सड़क पूरी तरह अवरुद्ध है।
नुवाकोट के टोखा-छहरे सड़क पर संभावित बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक यातायात बंद रखा गया है। बेलकोटगढी-10 स्थित पासाङ ल्हामु राजमार्ग भी पूरी तरह बंद है।
संचार क्षेत्र में नेपाल टेलिकॉम के 110 और एनसेल के 78 मोबाइल टावर क्षतिग्रस्त हुए हैं।
783 मेगावाट क्षमता की जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित
बाढ़ से रसुवागढ़ी, रसुवा-भोटेकोशी, चिलिमे, लाङटाङ खोला, ऊपरी त्रिशूली-1, ऊपरी त्रिशूली-2, ऊपरी त्रिशूली-3ए, ऊपरी त्रिशूली-3बी, मैलुङ खोला, मध्य त्रिशूली गंगा, त्रिशूली, देवीघाट और सुपर त्रिशूली सहित कई जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है।
जलविद्युत और सौर ऊर्जा मिलाकर 783.385 मेगावाट स्थापित क्षमता प्रभावित हुई है। कई सबस्टेशन और ट्रांसमिशन लाइनें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
शिक्षा पर भी बड़ा असर
रसुवा, नुवाकोट और धादिङ के 19 विद्यालयों में पढ़ने वाले 6,901 विद्यार्थी इस आपदा से प्रभावित हुए हैं।
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8 विद्यालय पूरी तरह नष्ट हो गए।
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8 विद्यालय आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए।
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केवल 3 विद्यालय सुरक्षित बचे हैं।
स्वास्थ्य और पेयजल व्यवस्था चरमराई
रसुवा के स्याफ्रुबेँसी स्वास्थ्य चौकी, टिमुरे स्वास्थ्य चौकी, रसुवागढ़ी हेल्थ डेस्क और मैलुङ सामुदायिक स्वास्थ्य इकाई पूरी तरह ध्वस्त हो गई हैं।
धादिङ के गल्छी स्थित बैरेनी अस्पताल और चरौँदी आधारभूत स्वास्थ्य सेवा केंद्र को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
नुवाकोट के धुङ्गे और विदुर के दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।
विदुर पेयजल परियोजना को नुकसान पहुंचने से करीब 4.5 किलोमीटर पाइपलाइन और तीन सम्प वेल बह गए, जिससे 4,000 परिवारों की जलापूर्ति प्रभावित हुई। त्रिशूली कॉलोनी, देवीघाट और बेत्रावती पेयजल योजनाओं के प्रभावित होने से 465 अतिरिक्त परिवारों पर असर पड़ा है।
राष्ट्रीय निकुञ्ज और सरकारी कार्यालय भी क्षतिग्रस्त
लाङटाङ राष्ट्रीय निकुञ्ज के टिमुरे, स्याफ्रुबेँसी, मैलुङ और बन्दरे स्थित कार्यालय और भवन पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट हो गए हैं।
इसके अलावा नुवाकोट का कृषि विकास केंद्र और टिमुरे स्थित प्लांट क्वारंटीन कार्यालय भी बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए हैं।


