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दस जनवरी काे है पाैष पूर्णिमा, माेक्ष की कामना रखने वालाें के लिए है यह दिन खास

 

हिंदू धर्म में पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा का काफी अधिक महत्व माना जाता है। मोक्ष की कामना रखने वालों के लिए यह दिन बेहद खास होता है। इस तिथि को सूर्य और चंद्रमा का संगम भी कहा जाता है, क्योंकि पौष का महीना सूर्य देव का माह होता है और पूर्णिमा चंद्रमा की तिथि है।चंद्रमा के साथ-साथ पूर्णिमा का दिन भगवान विष्णु की अराधना को समर्पित होता है।

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तिथि व मुहूर्त-

पूर्णिमा तिथि आरंभ 02:34 बजे से (10 जनवरी 2020)
पूर्णिमा तिथि समाप्त 12:50 बजे *(11 जनवरी 2020)

जन्म मृत्यु से मिलता है छुटकारा-
पौष माह की पूर्णिमा को मोक्ष की कामना रखने वाले बहुत शुभ मानते हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इसके बाद माघ महीने की शुरूआत होती है। इस महीने में किए जाने वाले स्नान की शुरूआत भी पौष पूर्णिमा से ही होती है। मान्यता है जो व्यक्ति इस दिन विधिपूर्वक प्रात: काल स्नान करता है, वह मोक्ष का अधिकारी होता है। उसे जन्म मृत्यु के चक्कर से छुटकारा मिल जाता है अर्थात उसकी मुक्ति हो जाती है। चूंकि माघ माह को बहुत ही शुभ व इसके प्रत्येक दिन मंगलकारी माना जाता है, इसलिए इस दिन जो भी कार्य आरंभ किया जाता है, उसे फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान के बाद क्षमता अनुसार दान करने का भी महत्व बताया जाता है।

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कहां करें स्नान-
बनारस के दशाश्वमेध घाट व प्रयाग में त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाना बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। प्रयाग में तो कल्पवास कर लोग माघ माह की पूर्णिमा तक स्नान करते हैं। जो लोग प्रयाग या बनारस तक नहीं जा सकेते, ये किसी भी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करते हुए प्रयागराज का ध्यान करें।

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