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वीरगंज रिपोर्ट

 

जितेन्द्र साह

२०४७ साल का ही संविधान
लागू करने की माग
वीरगंज। राजसंस्था पुनर्स्थापना र्सर्ंघष समिति ने संवैधानिक और राजनीतिक संकट समाधान के लिए २०४७ साल का ही संविधान लागू करने की मांग करते हुए पत्रकार सम्मेलन किया। समिति के अध्यक्ष गणेश साह ने कहा कि देश को संकट से मुक्त करनेहेतु पुराने संविधान की ही आवश्यकता अभी चौतर्फी रुप मे महसूस की जा रही है। इसलिए विकल्प के रुप मे सभी के हित के लिए इसे दुबारा जीवित करना पडÞेगा। पत्रकार सम्मेलन में २१ सूत्रीय माँगपत्र में नेपाल में नहीं रहने वाले सभी फर्जी प्रमाण के आधार में बनाया गया, जन्मसिद्ध नागरिकता को खारेज करने के लिए सरकार का ध्यानाकर्षा कराया गया।
वीरगंज में बाल हिन्दी कविता प्रतियोगिता आयोजित
‘विश्व-हिन्दी-दिवस’ के अवसर पर ‘नेपाल हिन्दी साहित्य परिषद’ वीरगंज ने स्थानीय पूजन होटल के सभाकक्ष में विद्यालय स्तरीय ‘बाल हिन्दी कविता प्रतियोगिता’ का आयोजन किया। जिस में लगभग बीस सहभागियों को  कविता-वाचन का अवसर प्रदान किया गया। आयोजित समारोह की अध्यक्षता परिषद् ओमप्रकाश सिकरिया ने की और मुख्य अतिथि के रूप में सदभावना पार्टर्ीीे स्थानीय नेता एवं जिलाध्यक्ष निजामुद्दीन समानी थे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय वाणिज्य महादूतावास के कन्सुल, सूचना एवं संस्कृति पी.डी.देशपाण्डे मंच पर उपस्थित थे। निर्ण्ाायक मण्डल में के.सी.टी.सी.महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डाँ. हरीन्द्र हिमकर तथा हिन्दी भाषा ओर साहित्यानुरागी श्रीमती वन्दना कर्ण्र्ााीं। हिन्दी भाषा-प्रयोग को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रतियोगिता के लिए ‘सूर्योदय, धरती तथा विनम्रता’ शर्ीष्ाक निर्धारित किए गए थे।
इस प्रतियोगिता में स्थानीय डी.पी. एस.स्कूल की छात्रा द्वय  भव्या कुमारी और सौम्या चौरसिया क्रमशः प्रथम और तृतीय तथा द्वितीय स्थान पर पशुपति शिक्षा मन्दिर की निकिता जैन रहीं। इनके अतिरिक्त डी.ए.वी. की छात्रा श्रेया वाहेती तथा विश्व हिन्दू संस्कृत विद्यापीठ के विनय र्सराफ को विशिष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मंचासीन वक्ताओं ने हिन्दी के वैश्विक परिदृश्य की चर्चा करते हुए नेपाल में हिन्दी भाषा की लोकप्रियता की चर्चा की तथा यह भी कहा कि भाषा समाज को तोडÞने नहीं बल्कि जोडÞने का काम करती है। लेकिन सबने एक स्वर से स्वीकार किया कि नेपाल में हिन्दी के प्रति पर्ूवाग्राही राजनैतिक दृष्टिकोण के कारण इसका अतीत समृद्ध होते हुए भी वर्त्तमान निराशाजनक है।
डा. भट्टर्राई की बहिर्गमन पहली शर्त
नेकपा एमालेउपाध्यक्ष विद्यादेवी भण्डारी नर्ेर् वतमान्ा सरकार का बहिर्गमन ही दलों के बीच वार्ता की पहली शर्त होने की बात कही। वीरगन्ज में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने कहा, ‘बाबुराम भट्टर्राई के नेतृत्व वाली सरकार जबतक रहेगी विपक्षी दलों के साथ सहमति कभी नहीं हो सकती।
सत्तारुढÞ प्रमुख दल के नेतृत्व में रहे एकीकृत नेकपा माओवादी ने  संवैधानिक पदपर्ूर्ति नहीं करके र्सवसत्तावाद लादने की कोशिश की है, ऐसा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपनी आयु जितना बढÞा रही है, उतना ही वह नंगा होती जा रही है।
पत्रकार सम्मेलन में एमाले पर्सर्ााे संयोजक चिरञ्जीवि आचार्य, राष्ट्रिय परिषद् सदस्य बालगोपाल थापा, अखिल नेपाल महिला संघ की जिल्ला अध्यक्ष उषा चौधरी, नेपाल पत्रकार महासंघ के केन्द्रीय सदस्य महेश दास लगायत की उपस्थिति थी।

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