Fri. Feb 23rd, 2024

महोत्तरी। बाबा जलेश्वरनाथ महादेव मन्दिर ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टिकोणसे महत्वपर्ूण्ा माना गया हैं। यह मन्दिर मिथिला की पावनभूमि महोत्तरी जिला के जलेश्वर नगरपालिका वार्डनं. १ में पडÞता हैं। इस स्थान का महात्म्य ज्योर्तिमहालिंग शिव अवतार से भी प्रसिद्ध हैं। बाबा जलेश्वरनाथ के विशाल मन्दिर के अन्दर पत्थरोंसे निर्मित जो करीब ३० फीट नीचे पानी से भरे हुए गुफा में बाबा का शिवलिङ्ग विराजमान है। साल भर गुफा में पानी भरा हुआ रहता हैं। मन्दिर में पूजा सम्बन्धी सभी कार्य पुजारी सम्हालते हैं। यहाँ दर्शन करनेके लिए लोग भारत और नेपाल के दर्शनार्थी दूर दूर से आते रहते हैं।
खासकर जनकपुर में विवाह पंचमी और रामनवमी के अवसर पर भारत के उत्तरप्रदेश, झारखण्ड, विहार से आने बाले श्रद्धालु पहले बाबा जलेश्वरनाथ के मन्दिर में दर्शन करने के पश्चात् ही जनकपुर की ओर जाते हैं। वैसे तो प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं की भीडÞ लगी रहती हैं लेकिन महाशिवरात्री में भीडÞ देखने लायक होती है। स्थानीय युवाओं द्वारा महाशिवरात्री के महोत्सव में झाँकी निकालकर बाजेगाजे के साथ नगर परिक्रमा करते हुए नेपाली सेना, शसस्त्र पुलिस स्थानीय स्वयम् सेवक के सहयोग में गुफासे जल निकालकर महालिङ्गका दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओ को सहयोग किया जाता हैं। लोगों का यह भी कहना हैं कि जो भी मनोकामनाएँ यहाँ की जाती हैं, वह पूरी होती हैं।
यहाँ के व्यापारी, बुद्धिजीवी, सरकारी निकाय अपनी भावनाओं से ऊपर उठकर धार्मिक दृष्टिकोणसे सहयोग करें तो भारत के झारखण्ड स्थित बाबा बैद्यनाथधाम की तरह यहाँ भी दर्शनार्थियों की संख्या दिनप्रतिदिन बढÞती ही जायेगी। क्योंकि इस महालिङ्ग को संसार में रहे १२ ज्योर्तिलिङ्ग के गुरु के नाम से जाना जाता हैं वैसे तो कई पुराणों में जलेश्वरनाथ महादेव की चर्चा की गई हैं। जैसे पद्मपुराण में ‘जलेश्वरों महालिङ्गो रुद्रेण स्थापित स्वयम्’ लिखा गया हैं अर्थात् यह महालिङ्ग स्वयम् भगवान रुद्र द्वारा स्थापित किया गया उल्लेख है।
इसी तरह वृहत विष्णु पुराण मिथिला माहात्म्यके अनुसार र्’र्सवसिद्धि करं लिङ्गम्, वारुणाख्यां जलेश्वरम्’ उल्लेख है, तो शिव पुराण में ‘ज्योर्तिमयो जगन्नाथो निराकारो जलेश्वरः’ उल्लेख किया गया है। अर्थात् स्वयम् भगवान द्वारा इस महालिङ्ग को स्थापित किया गया उल्लेख पुराणों में मिलता है।
बाबा जलेश्वरनाथ के दर्शन करने हेतु आने के लिए भारत के दर्शनार्थी सीतामढÞी जिला भिठ्ठामोड से ५ कि.मी.उत्तर, मधुवनी जिला मधवापुर से शुकदेव मुनीके आश्रम सुगा होते हुए ७ कि.मी पश्चिम, नेपाल के दर्शनार्थी सम्सीसे करीब २० कि.मी. पर्ूव, बर्दिवास से ४२ कि.मी.दक्षिण और जनकपुरसे १५ किमी दक्षिणकी दूरी पर यह मन्दिर है। मन्दिर के प्राङ्गण में रहा पुरन्दर सर और मन्दिर से पर्ूव मंे स्थित वरुणसर में कभी कमल के पुष्प खिला करते थे परन्तु अभी सरसफाई के अभाव में ये पोखर दर्ुगन्धित बनता जा रहा हैं।
ऐतिहासिक मन्दिर परिसर का क्षेत्रफल जिस तरह पहले फैला हुआ था, वह देखरेख के अभाव मंे चारों ओर से अतिक्रमित होने से लोगों का ध्यान इस ओर जाना चाहिए। ताकि इस मन्दिर को पर्यटकीय क्षेत्र के रुप में घोषित किया जा सके। इस मन्दिर की देखरेख व्यवस्थापन समिति, नगरपालिका और गुठी संस्थानद्वारा तो किया जाता हैं लेकिन अभी मन्दिर परिसर के कुछ पुराने घर किसी भी समय गिरने के कगार पर हैं। इस विषय पर सम्बन्धित निकायों को ध्यान देकर मन्दिरको पर्यटकीय स्वरुप प्रदान करना अति आवश्यक हैं।
फोटो सौजन्य ः नागेन्द्रकुमार कर्ण्र्ााहोत्तरी





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