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अध्यादेश वापस लेने के लिए प्रधानमंत्री तैयार

 

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली विवादास्पद अध्यादेश को वापस लेने के लिए सहमत हो गए हैं। एक उच्च पदस्थ सीपीएन (माओवादी) स्रोत के अनुसार, ओली बालुवाटार में महासचिव बिष्णु पोडेल और प्रचंड के साथ बातचीत के दौरान अध्यादेश वापस लेने के लिए सहमत हो गए हैं।

CPN (माओवादी) के भीतर विवाद के कारण संवैधानिक परिषद की बैठक बाधित होने के बाद, प्रधान मंत्री ओली ने मंगलवार को संवैधानिक परिषद (कार्य, कर्तव्य, अधिकार और प्रक्रिया) अध्यादेश (प्रथम संशोधन) अध्यादेश, 2077 BS लेकर आए थे जिसे सरकार द्वारा सिफारिश कररने पर राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी द्वारा पारित कर दिया गया था ।

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उसके बाद से ही अध्यादेश लाए जाने का सत्तारूढ़ सीपीएन (माओवादी) और विपक्षी नेपाली कांग्रेस के भीतर से ओली की तीखी आलोचना की गई।

प्रधानमंत्री और सीपीएन (माओवादी) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली द्वारा मंगलवार सुबह बुलाई गई संवैधानिक परिषद की बैठक अध्यक्ष अग्नि प्रसाद सपकोटा की अनुपस्थिति के कारण स्थगित कर दी गई थी। बैठक के बार-बार अवरुद्ध होने के बाद, ओली ने जल्दबाजी में पार्टी के भीतर बिना किसी परामर्श के प्रचंड और अन्य लोगों को दिखाने की शैली में अध्यादेश लाया।
इसी अध्यादेश के कारण, प्रधानमंत्री ओली पार्टी के अंदर और बाहर और साथ ही शीर्ष अदालत में एक रिट याचिका दायर करने के बाद वापस लौटने के लिए सहमत हो गए हैं।

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इसी तरह, बालुवाटार में चर्चा के दौरान, संसद की बैठक बुलाने का अनुरोध करने वाले ओली अन्य समूह द्वारा राष्ट्रपति को सौंपे गए हस्ताक्षर को वापस लेने पर भी सहमति हुई। इस समझौते के साथ, ओली के साथ बलुवतार में स्थायी समिति की बैठक शुरू हो गई है।

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