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हिन्दू विक्रम संवत अंग्रेजी कलेंडर से ५८ साल आगे है : श्वेता दीप्ति

 

हिंदू नववर्ष की महत्ता

डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय, हिमालिनी अंक अप्रैल 2024 । हिंदू धर्म की ज्यादातर बातें वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं । हजारों साल पहले ही हमारे ऋषियों मुनियों ने वे बातें तक बता दी थीं, जिन्हें विज्ञान आज भी नहीं खोज पाया है । इसी सन्दर्भ में आज चर्चा हिन्दू नव वर्ष की । नेपाल में जहाँ बैसाख एक गते नव वर्ष मनाया जाता है, वहीं भारत में यह चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है । हिन्दू संस्कृति में ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि की रचना की शुरुआत की थी ।

हिन्दू विक्रम संवत अंग्रेजी कलेंडर से ५८ साल आगे है । विक्रम संवत की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने किया था । राजा विक्रमादित्य विक्रम संवत के शुरू होने के साथ ही अपने साम्राज्य की जनता के सारे कर्जों का माफ कर उन्हें राहत प्रदान करते थे । विक्रम संवत हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो जाती है । इस संवत को गणितीय नजरिए से एकदम सटीक काल गणना माना जाता है । विक्रम संवत को राष्ट्रीय संवत माना गया है । अंग्रेजी के तरह ही इस कैलेंडर में भी ३६५ दिन का होते हैं । अंग्रेजी कलेंडर के नए साल की शुरुआत जहां १ जनवरी से होती है, वहीं विक्रम संवत पर आधारित कैलेंडर के महीने चैत्र से प्रारम्भ होते हैं । इसकी समयावधि ३५४ दिनों की होती है शेष बढ़े हुए १० दिन अधिमास के रूप में माने जाते हैं ।

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‘ब्रह्म पुराण’ में कहा गया है कि चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को ही ब्रह्मा जी ने संसार की रचना की थी । अनुमान के अनुसार लगभग १ अरब १४ करोड़ ५८ लाख ८५ हजार १२३ साल पहले चैत्र माह की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन संसार का निर्माण हुआ था । यही कारण है कि इस दिन हिंदू नववर्ष मनाया जाता है ।

इसके अलावा विक्रमादित्य ने अपने नाम से संवत्सर की शुरुआत भी चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को ही की थी । इसलिए हिंदू नववर्ष को विक्रमी संवत्सर भी कहा जाता है । इस साल विक्रम संवत को २०८० वर्ष पूरे हो रहे हैं और विक्रम संवत २०८१ लग रहा है । चैत्र ÷बैसाख महीने में नववर्ष मनाए जाने का एक कारण ये भी है कि यह महीना प्रकृति की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है । इस समय पेड़ों लताएं और फूल बढ़ने के लिए लगे होते हैं । हिंदू धर्म में चांद और सूरज को भी देवता की तरह पूजा जाता है और चैत्र महीने में ही चंद्रमा की कला का प्रथम दिन होता है । ये कारण भी है कि इसी दिन नववर्ष मनाया जाता है । ऋषियों मुनियों ने नववर्ष के लिए चैत्र महीने को एकदम उपयुक्त माना है । चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष नवमी तिथि को श्रीराम ने जन्म लिया था, इस कारण भी यह महीना पावन माना गया है । इसके अलावा शक्ति और भक्ति के नौ दिन यानी नवरात्र का पहला दिन चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष से ही शुरू होता है ।

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आइए नववर्ष का स्वागत करें इस उम्मीद के साथ कि आने वाला हर दिन सकारात्मक और उर्जावान रहे । ‘हिमालिनी परिवार’ की ओर से हमारे पाठक, लेखक और विज्ञापनदाताओं के साथ समस्त मानव जाति को नववर्ष की मंगलमय शुभकामनाएँ ।

डॉ श्वेता दीप्ति,
सम्पादक हिमालिनी

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