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प्रधानमंत्री ओली ने काठमांडू-तराई/मधेश फास्ट ट्रैक परियोजना के शुरुआती बिंदु पर चर्चा की

 

काठमांडू —

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने काठमांडू-तराई/मधेश फास्ट ट्रैक परियोजना के शुरुआती बिंदु विवाद और इसे हल करने के तरीकों को समझने के लिए ललितपुर में खोकना और बङुमति   के स्थानीय निवासियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की है।

नेपाली सेना के प्रबंधन में बन रहे फास्ट ट्रैक के ललितपुर हिस्से को लेकर विवाद अभी तक नहीं सुलझ पाया है। इस वजह से इस क्षेत्र में शुरुआती बिंदु कहां होगा, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सेना को इसके निर्माण प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाले 7 साल हो चुके हैं, लेकिन खोकना सेक्शन में समस्या जस की तस बनी हुई है। खोकना/  बङुमति सेक्शन के 6.5 किलोमीटर हिस्से पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है। कुल 70.977 किलोमीटर की दूरी में से सिर्फ 64.477 किलोमीटर का ठेका हुआ है और काम चल रहा है। असमंजस की इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री ने पहल की है।

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बलुवाटर में आयोजित चर्चा में खोकना वीडीसी के पूर्व अध्यक्ष मदन कृष्ण डांगोल, सीपीएन (यूएमएल) ललितपुर महानगर समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र शाक्य, स्थानीय जन सरोकार समिति के समन्वयक नेपाल डंगोल और यूएमएल ललितपुर महानगर वार्ड नंबर 21 समिति के अध्यक्ष ज्ञानभक्त महर्जन शामिल हुए। सरोकार समिति ने प्रारंभिक बिंदु स्थल से साढ़े पांच किलोमीटर नीचे खोकना में स्थापित करने का विकल्प दिया है, क्योंकि यदि प्रारंभिक बिंदु स्थापित किया गया तो पारंपरिक सभ्यता और संस्कृति नष्ट हो जाएगी। रक्षा मंत्रालय के सचिव रामेश्वर डांगल, प्रधान मंत्री कार्यालय और मंत्रिपरिषद के अधिकारी और नेपाली सेना के प्रतिनिधियों ने भी चर्चा में भाग लिया। प्रधान मंत्री ओली ने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों की कीमत पर विकास करना सरकार का लक्ष्य नहीं है और कहा कि वह निर्णय पर पहुंचने से पहले समस्या को हल करने के लिए साइट का दौरा करेंगे। इससे पहले माघ 23 को प्रधानमंत्री ओली ने उप प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री बिष्णु प्रसाद पौडेल, भौतिक संरचना एवं परिवहन मंत्री देवेन्द्र दहाल, रक्षा मंत्री मानबीर राय, प्रधानमंत्री के आर्थिक मामलों के सलाहकार डॉ. युबराज खतीवाड़ा और नेपाली सेना के सेनाध्यक्ष अशोकराज सिगडेल के साथ प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय, सिंह दरबार में फास्ट-ट्रैक परियोजना की प्रगति एवं समस्याओं पर चर्चा की थी। 211.93 अरब रुपये की लागत से बनने वाली और कुल 70.97 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली सड़क परियोजना की शुरुआत 2074  में हुई थी। परियोजना को पूरा करने की संशोधित समय-सीमा चैत्र 2083  के अंत तक है।

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