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सुखाग्रस्त मधेश क्षेत्र के समाधान के लिए दीर्घकालीन योजना की मांग

 


काठमांडू, हिमालिनी सवांददाता, १३ साउन २०८२ । तराई–मधेश के सुखाग्रस्त जिलों में गंभीर जल संकट और कृषि संकट को लेकर मधेशवादी दलों द्वारा सरकार से दीर्घकालीन समाधान की मांग की गई है। जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव की अध्यक्षता में संघीय लोकतान्त्रिक मोर्चा की केन्द्रीय मूल समिति की बैठक सिंहदरबार स्थित संसदीय दल कार्यालय में सम्पन्न हुई। बैठक में विभिन्न अहम निर्णय लिए गए, जिनका उद्देश्य मधेश क्षेत्र के संकटग्रस्त नागरिकों की तत्काल राहत तथा दीर्घकालीन संरक्षण सुनिश्चित करना है।

बैठक के प्रमुख निर्णय

1. तत्काल राहत और कृषि सहयोग की मांग:

  • सुखा से प्रभावित किसान धान की खेती नहीं कर पा रहे हैं। इस संकट को ध्यान में रखते हुए बैठक ने सरकार से मांग की है कि:
    • पीड़ित किसानों को कृषि ऋण में छूट दी जाए।
    • पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
    • सिचाई के लिए डिपवेल बोरिंग की व्यापक व्यवस्था की जाए।
    • आगामी फसल सत्र के लिए किसानों को रियायती दर पर खाद, बीज, कीटनाशक और सिंचाई की सुविधाएं प्रदान की जाएं।
    • इन सभी उपायों को अनुदान सहायता के रूप में दिया जाए।
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2. दीर्घकालीन समाधान की रूपरेखा:

  • चुरे क्षेत्र का संरक्षण और जलाशय निर्माण को दीर्घकालीन समाधान के रूप में प्रमुखता देने की आवश्यकता बताई गई।
  • पर्यावरणीय असंतुलन के कारण मधेश क्षेत्र में जल संकट उत्पन्न हो रहा है, जिससे निपटने के लिए विशेष नीति निर्माण की मांग की गई है।

3. संघीय लोकतान्त्रिक मोर्चा के कार्यक्रम:

  • बैठक में विभिन्न जिलों में निर्धारित कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जिनमें विभिन्न मधेशवादी दल भाग लेंगे। प्रमुख कार्यक्रम इस प्रकार हैं:
    • १८ श्रावण: काठमाडौं – संयुक्त कार्यक्रम
    • २१ श्रावण: भैरहवा – नाउपा
    • २३ श्रावण: नेपालगंज
    • २५ श्रावण: कैलाली – नाउपा
    • १६ भदौ: विराटनगर – जसपा नेपाल
    • १८ भदौ: राजविराज – राष्ट्रिय मुक्ति पार्टी नेपाल
    • २० भदौ: जनकपुर – तमलोपा
    • २२ भदौ: वीरगंज – लोसपा नेपाल
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4. नए राजनीतिक संवाद की पहल:

  • मोर्चा ने अधिकार और पहिचान आधारित राजनीतिक दलों के साथ सहयोग की नीति के तहत संघीय लोकतान्त्रिक राष्ट्रिय मंच और नेपाल जनमुक्ति पार्टी से संवाद प्रारम्भ करने का निर्णय लिया है।

मधेश क्षेत्र में वर्षा न होने के कारण उत्पन्न संकट को सिर्फ अस्थायी राहत से नहीं सुलझाया जा सकता। मधेशवादी दलों ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से दीर्घकालीन उपायों को अपनाना अब समय की मांग है। सरकार को चाहिए कि वह सिर्फ घोषणाओं तक न रुके, बल्कि प्रभावित किसानों और नागरिकों के जीवन-निर्भर संसाधनों को बचाने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाए।स्रोत: केशव झा

 

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