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कुलमान घिसिङ के राजनीतिक भविष्य पर सवाल, उज्यालो नेपाल पार्टी से बढ़ी अटकलें

 

काठमांडू, ३ऑक्टोबर,बविश्लेषणात्मक रिपोर्ट। 

नेपाल की ऊर्जा क्षेत्र में “परिवर्तनकारी चेहरा” माने जाने वाले कुलमान घिसिङ अब राजनीति में प्रवेश करने जा रहे हैं या नहीं—यह सवाल इन दिनों चर्चा के केन्द्र में है। हाल ही में निर्वाचन आयोग में दर्ता हुई उज्यालो नेपाल पार्टी (उनेपा) ने उनके साथ वर्चुअल बैठक तय की है, जिससे इन अटकलों को और बल मिला है।

कुलमान का नाम क्यों चर्चा में?

  • कुलमान घिसिङ, नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) का नेतृत्व करते हुए, लोडशेडिंग समाप्त करने वाले प्राविधिक प्रबन्धक के रूप में जनप्रिय बने।
  • “उज्यालो नेपाल अभियान” के कई कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति ने यह संकेत दिया कि वे केवल ऊर्जा विशेषज्ञ नहीं, बल्कि अब सार्वजनिक नेतृत्व की ओर भी कदम बढ़ा सकते हैं।
  • हालांकि उन्होंने अभी तक राजनीति में औपचारिक प्रवेश की घोषणा नहीं की है।
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उज्यालो नेपाल पार्टी की रणनीति

  • अध्यक्ष ज्ञानेंद्र तामाङ ने साफ कहा है कि वे नए विचार, पेशेवर नेतृत्व और युवा ऊर्जा को राजनीति में लाना चाहते हैं।
  • पार्टी का घोषणापत्र और अवधारणा पत्र “सुधारवादी एवं विकासमुखी राजनीति” पर आधारित होने का दावा किया जा रहा है।
  • कुलमान जैसे लोकप्रिय व्यक्तित्व की भागीदारी पार्टी को तुरंत राष्ट्रीय पहचान दिला सकती है।

राजनीतिक असर

  1. स्थापित दलों के लिए चुनौती – यदि कुलमान ने राजनीति में सक्रिय भूमिका ली, तो उनका “क्लीन इमेज” और तकनीकी दक्षता जनता को आकर्षित कर सकती है। इससे परंपरागत दलों की पकड़ कमजोर हो सकती है।
  2. नई राजनीतिक संस्कृति का अवसर – उज्यालो नेपाल पार्टी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विदेश में बसे नेपाली समुदाय को साथ लाने की कोशिश कर रही है। यह नवप्रवर्तनवादी राजनीति का संकेत है।
  3. जोखिम और चुनौती – कुलमान की लोकप्रियता ऊर्जा प्रबंधन में उनकी सफलता पर टिकी है। राजनीति की जटिल समीकरणों में वही करिश्मा कायम रखना उनके लिए कठिन हो सकता है।
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निष्कर्ष

उज्यालो नेपाल पार्टी अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन कुलमान घिसिङ के नाम के साथ जुड़ते ही इसे मीडिया स्पेस और राजनीतिक बहस दोनों में स्थान मिल चुका है। अब असली सवाल यही है कि –
क्या कुलमान केवल सलाहकार भूमिका निभाएंगे, या फिर वास्तव में नेता के रूप में राजनीति में प्रवेश करेंगे?

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