मधेश प्रदेश में नई सरकार गठन की हलचल
१७ असोज, काठमाडौं। मधेश प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदलते ही नई सरकार गठन की कोशिशें तेज हो गई हैं। जनमत पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में गिरने के बाद अब कांग्रेस, एमाले और अन्य दलों के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर गहन चर्चा शुरू हो चुकी है।
नेपाली कांग्रेस की प्रदेश सांसद अंजना पंडित ने बताया कि कांग्रेस और एमाले के बीच बातचीत जारी है। उनके अनुसार, “संभावना यही है कि कांग्रेस के नेतृत्व में नई सरकार बनेगी, एमाले के साथ लगातार संवाद हो रहा है। सरकार गठबंधन की आधारशिला पर ही टिकी होगी।”
संख्याबल का समीकरण
मधेश प्रदेश की 107 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 54 सीटों की आवश्यकता है। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
- एमाले – 25
- कांग्रेस – 22
- जनता समाजवादी पार्टी – 19
- जनमत पार्टी – 13
- लोसपा – 9
- माओवादी केन्द्र – 9
- एकीकृत समाजवादी – 7
- नेपाल संघीय समाजवादी पार्टी, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी और राप्रपा – 1–1
यदि कांग्रेस और एमाले एक साथ आते हैं तो उनके पास कुल 47 मत होंगे। ऐसे में लोसपा का समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है।
महन्थ ठाकुर की सक्रियता
लोसपा भी सरकार के नेतृत्व की दावेदार है। इस सिलसिले में लोसपा के केन्द्रीय अध्यक्ष महन्थ ठाकुर हाल ही में मधेश पहुँचे, जहाँ उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों और अपने पार्टी नेताओं से गहन चर्चा की। अब वे काठमांडू लौट चुके हैं और बताया जा रहा है कि शीर्ष स्तर पर विचार–विमर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
लोसपा के प्रदेश सांसद उपेन्द्र महतो ने कहा, “सरकार में नेतृत्व करना है या नहीं, मुख्यमन्त्री कौन होगा और यदि नेतृत्व नहीं मिला तो आगे की रणनीति क्या होगी—इन सब विषयों पर अन्तिम फैसला केन्द्रीय अध्यक्ष ठाकुर करेंगे। हम उसी के अनुसार कदम बढ़ाएँगे।”
दो संभावित विकल्प
प्रदेश में सरकार गठन को लेकर दो तरह के विकल्पों पर चर्चा हो रही है:
- कांग्रेस–एमाले और लोसपा मिलकर नई सरकार का गठन करें।
- कांग्रेस–एमाले को छोड़कर शेष दल मिलकर एक साझा गठबंधन बनाएँ।
सांसद महतो का दावा है कि दोनों ही तरह के गठबंधन पर बातचीत करने वाले दल लोसपा को ही सरकार का नेतृत्व देने को तैयार हैं।
पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ८ असोज को नेपाली कांग्रेस ने मधेश प्रदेश सरकार को दिया गया समर्थन वापस ले लिया था। इसके चलते जनमत पार्टी के नेता सतिशकुमार सिंह के नेतृत्व वाली सरकार अल्पमत में आ गई थी।
कुल मिलाकर, मधेश प्रदेश की राजनीति इस समय निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। सबकी निगाहें लोसपा अध्यक्ष महन्थ ठाकुर के फैसले पर टिकी हुई हैं, जो आगामी सरकार का स्वरूप तय करेगा।


