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राग और ताल की सुरमयी संध्या: नए अभिभावकों के स्वागत में सजा सांस्कृतिक मंच

 

काठमांडू, 5 मई 2026। डीएवी स्कूल ने सुषिला आर्ट्स एकेडमी के सहयोग से 3 मई को अपने प्रांगण स्थित बुद्ध हॉल में “क्लासिकल ईवनिंग ऑफ राग एंड ताल” का भव्य आयोजन कर नए अभिभावकों का गरिमामय स्वागत किया। यह सांस्कृतिक संध्या भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की समृद्ध परंपरा को समर्पित रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ राकेश पांडे (भारतीय दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन) की उपस्थिति रही, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री मति पारुल पांडे शामिल हुईं। इस अवसर पर डीएवी स्कूल के अध्यक्ष श्री अनिल केडिया , भारत से आए प्रख्यात कलाकार—भरतनाट्यम नृत्यांगना , कथक कलाकार , गायक , तबला वादक तथा सुषिला आर्ट्स एकेडमी की संस्थापक की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और स्वागत भाषण के साथ हुई। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का मनोहारी सिलसिला आरंभ हुआ। संध्या की शुरुआत महान गायिका को समर्पित एक भावपूर्ण गायन से हुई, जिसके बाद नन्हे विद्यार्थियों द्वारा भरतनाट्यम की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। अतिथि कलाकार शशि रमेश की प्रस्तुति ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया।

इसके पश्चात कथक नृत्य, शास्त्रीय गायन और तबला वादन की उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दी गईं। जूनियर विद्यार्थियों द्वारा गणेश वंदना, अर्पणा माने का कथक नृत्य और वरिष्ठ विद्यार्थियों का भरतनाट्यम प्रदर्शन कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे।

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इस अवसर पर प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद (भारत) के डिप्लोमा कार्यक्रम में प्रथम से चतुर्थ वर्ष तक उत्तीर्ण छात्रों को प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही डीएवी स्कूल और सुषिला आर्ट्स एकेडमी के संगीत एवं नृत्य शिक्षकों को उनके समर्पण के लिए सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि डॉ. पांडेय ने अपने संबोधन में कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र के बच्चों की प्रतिभा प्रेरणादायक है। उन्होंने इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों को नेपाल और भारत के बीच जन-स्तर के संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण बताया।

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वहीं डीएवी स्कूल के उप-प्रधानाचार्य ने कहा कि यह आयोजन संस्था की पूर्वी दर्शन और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि डीएवी स्कूल विश्वभर में फैले 900 से अधिक विद्यालयों और 75 विश्वविद्यालयों-कॉलेजों के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा है, जो के आदर्शों से प्रेरित है।

यह सांस्कृतिक संध्या न केवल नए अभिभावकों के स्वागत का माध्यम बनी, बल्कि भारतीय शास्त्रीय कला की गरिमा और उसकी जीवंतता का भी सुंदर प्रदर्शन प्रस्तुत किया।

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