Wed. Jun 17th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

जनकपुर-अयोध्या रेल सेवा, रक्सौल-काठमांडू रेल लिंक और पूर्व–पश्चिम रेलवे परियोजना पर हुई विस्तृत चर्चा

 

भारत-नेपाल सीमा पार रेलवे परियोजनाओं पर काठमांडू में अहम बैठक

काठमांडू, 12 जून 2026। भारत और नेपाल के बीच रेलवे क्षेत्र में सहयोग को नई गति देने के उद्देश्य से 11 और 12 जून 2026 को काठमांडू में परियोजना संचालन समिति (Project Steering Committee-PSC) की 10वीं बैठक तथा संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group-JWG) की 8वीं बैठक आयोजित की गई। इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों ने सीमा पार रेल परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक में विशेष रूप से भारत सरकार की अनुदान सहायता से विकसित हो रही जयनगर–बिजलपुरा–बर्दीबास तथा जोगबनी–विराटनगर ब्रॉड गेज रेल परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर विचार किया गया। दोनों पक्षों ने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

यह भी पढें   सेफ संतोष साह गिरफ्तार

बैठक के दौरान जनकपुर–अयोध्या खंड पर यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने के लिए आवश्यक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedures-SOPs) पर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यह रेल सेवा केवल परिवहन ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई दिशा देगी। जनकपुर माता सीता की जन्मस्थली तथा अयोध्या भगवान राम की नगरी होने के कारण इस रेल संपर्क को दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके अलावा बहुप्रतीक्षित रक्सौल–काठमांडू ब्रॉड गेज रेलवे परियोजना की फाइनल लोकेशन सर्वे (Final Location Survey-FLS) रिपोर्ट पर भी विचार-विमर्श किया गया। यह परियोजना नेपाल की राजधानी काठमांडू को सीधे भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पूरा होने से नेपाल के व्यापार, पर्यटन और यातायात क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलेगा।

यह भी पढें   राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण – 6

बैठक में नेपाल की पूर्व–पश्चिम रेलवे परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग तथा भविष्य में अतिरिक्त रेलवे संपर्क विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने रेलवे सहयोग को रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए इसे और मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की।

बैठक के अंत में भारत और नेपाल ने रेलवे क्षेत्र में निरंतर संवाद और घनिष्ठ सहयोग बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने कहा कि सीमा पार रेल संपर्क केवल बुनियादी ढांचा विकास का विषय नहीं, बल्कि भारत-नेपाल के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने का माध्यम भी है।

यह भी पढें   महिला सशक्तिकरण: प्रगतिशील और सफल समाज की आधारशिला : अधिवक्ता शिव गणेश कर्नाटी

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और नेपाल के बीच तेजी से विकसित हो रहा रेलवे नेटवर्क भविष्य में व्यापार, पर्यटन, धार्मिक यात्राओं और लोगों के बीच संपर्क को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकता है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *