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पूर्व राजदूत उपाध्याय की अध्यक्षता में ‘पारदर्शी समाज’ नामक संगठन का गठन

 

काठमांडू, 28 जून।

देश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘पारदर्शी समाज’ नामक एक नए संगठन का गठन किया गया है। इस संगठन के अध्यक्ष पूर्व राजदूत दीपकुमार उपाध्याय बनाए गए हैं।

संगठन के अन्य सदस्यों में वासु दाहाल, संतोष गिरी, सोमबहादुर थापा और मुमाराम खनाल शामिल हैं।

संगठन ने बताया कि वह भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, सार्वजनिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए नागरिक स्तर से निगरानी करेगा। साथ ही, भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की तथ्यात्मक जांच और अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा। इसके लिए ‘पारदर्शीसमाज डट ओआरजी’ नाम से एक वेबसाइट भी शुरू की गई है।

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वेबसाइट के शुभारंभ के अवसर पर अध्यक्ष दीपकुमार उपाध्याय ने कहा कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और प्रभावी सुशासन के बिना देश की स्थिति में सुधार संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। उनके अनुसार, पहले सरकार को पुराने ऋण का मूलधन और ब्याज चुकाने तथा सामान्य सरकारी खर्च चलाने के लिए लगभग 2 खरब नेपाली रुपये का नया ऋण लेना पड़ता था, जबकि अब यह आवश्यकता बढ़कर 4 खरब रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने इसका प्रमुख कारण भ्रष्टाचार और कमजोर सुशासन को बताया।

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उपाध्याय ने यह भी कहा कि सरकार की आय नहीं बढ़ रही, लेकिन खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है और केवल ऋण के सहारे व्यवस्था चल रही है, जिसकी भी एक सीमा होती है।

कार्यक्रम में पूर्व सचिव द्वारिकानाथ ढुंगेल ने कहा कि नेपाल में सुशासन और पारदर्शिता की स्थिति अभी भी कमजोर है। उन्होंने कहा कि देश अब भी पुराने कानूनी ढांचे और कार्यप्रणाली के आधार पर संचालित हो रहा है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।

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उन्होंने सरकारी कार्य-संचालन नियमावली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सूचना का अधिकार होने के बावजूद आम नागरिकों को संबंधित सरकारी निकायों से समय पर जानकारी नहीं मिल पाती।

संगठन ने यह भी जानकारी दी कि 23 और 24 भाद्र को हुए जनजी आंदोलन के संबंध में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय तथ्यों के आधार पर अध्ययन और शोध का कार्य भी किया जा रहा है।

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