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बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने कहा मधेशियों की समस्या जल्द समाधान होना चहिए ।

 
काठमान्डौ, ३मार्च
बिहार के मुख्यमंत्री नितिश कुमार का नेपाली काँग्रेस से गहरी मित्रता रही है इसलिए वो काँग्रेस के आमंत्रण पर काठमान्डौ काँग्रेस के अधिवेशन में शामिल होने के लिए आए हुए हैं ।
FB_IMG_1457015009783-1 काफी दिनों से नीतिश कुमार की इच्छा नेपाल आने की थी किन्तु किसी ना किसी वजह से उनकी यात्रा टलती रही और इसकी उन्हें मनमोहन सरकार और मोदी सरकार दोनों से शिकायत थी । किन्तु इस बार उनकी हसरत पूरी हो गई फिलहाल काठमान्डौ में नेताओं से मुलाकात जारी है । उन्होंने द्वारिका होटल में मोर्चा के नेताओं राजैन्द्र महतो बृषेसलाल आदि नेताओं से मुलाकात की । उनकी जिज्ञासा सीमांकन, संघीयता और नागरिकता को लेकर थी । उन्होंने कहा कि जब संविधान के प्रति असहमति थी तो नेताओं ने हस्ताक्षर कैसे किया । उन्होंने यह भी कहा कि जब तक विभेद कायम होगा तब तक शांति और स्थिरता नहीं हो सकती । इसलिए मधेशी दलों और मधेश को सहमति में लेकर ही आगे बढना होगा । पिछले समय में जो भारत और नेपाल के रिश्तों में तिक्तता आई है उसके सम्बन्ध में भी कहा कि इससे सीमा पर असर पड रहा है । मधेशियों की समस्या का जल्द से जल्द समाधान होना चाहिए इस बात पर उन्होंने विशेष बल दिया ।
खैर जो भी हो नीतिश की नेपाल यात्रा की इच्छा को मोदी सरकार ने पूरी कर ही दी । जनकपुर की यात्रा अभी बाकी है । 
मनमोहन सिंह सरकार और नरेंद्र मोदी सरकार से बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की एक समान शिकायत थी कि वो जब भी नेपाल जाने की इच्‍छा जाहिर करते सरकार उसे टाल देती, लेकिन इसबार नरेंद्र मोदी सरकार ने नीतीश कुमार को नेपाल जाने की अनुमति दे दी जिसकी वजह से नीतीश पहली बार बुधवार को नेपाल के दो दिनों के दौरे पर आए हैं। नेपाली कांग्रेस के महाधिवेशन में नीतीश को आमंत्रण मिला और इस बार केंद्र ने उनकी यात्रा पर अपनी रज़ामंदी दे दी।
 
दरअसल, नेपाली कांग्रेस और मधेसी नेताओं से बिहार के नेताओं खासकर नीतीश और लालू यादव के संबंध मधुर रहे हैं। उसका एक कारण है कि जब नेपाल में ६० और ७० के दशक में लोकतंत्र के लिए आंदोलन चल रहा था तब अधिकांश नेपाली कांग्रेस के नेता पटना और वाराणसी में रहते थे और तब ये दोनों नेता छात्र आंदोलन में सक्रिय थे।
 
बाद के दिनों में जब लालू यादव पहले पहले साथ में थे, तब नेपाली कांग्रेस के कोई भी नेता अगर बिहार के दौरे पर आते थे तब उन्‍हें राजकीय अतिथि का दर्जा दिया जाता था और नीतीश कुमार ने भी अपने रेल मंत्री के कार्यकाल में नेपाल सीमा की और जाने वाली रेल लाइनों के विस्तार के लिए सहमति दी और बाद में वीरगंज में ड्राई पोर्ट के लिए भी रक्सौल से रेलवे ट्रैक बनाने की मंजूरी दी।
 
इससे पहले नीतीश कुमार नवंबर २०१४ में जनकपुर जाना चाहते थे और पिछले साल भूकंप के बाद भी नेपाल के तराई के इलाकों में जाकर लोग की स्थिति की जानकारी लेना चाहते थे, लेकिन भारत सरकार ने मंजूरी नहीं दी। उससे पहले नेपाल के भूतपूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला की मृत्‍यु के बाद उनके अंतिम संस्कार में जाने की इच्‍छा जताने पर भी जाने की अनुमति नहीं मिली थी और जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली नेपाल यात्रा के दौरान नेपाल में सप्तकोशी नदी में डैम टूटने के बाद भी वो उस इलाके में जाना चाहते थे तब भी भारत सरकार ने हाथ खड़े कर दिए थे।

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