Mon. May 18th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

दिग्भ्रमित राजनेता नेपाल की राजनीति को पथभ्रष्ट कररहें हैं : गंगेश मिश्रा

 

गंगेशकुमार मिश्र , कपिलबस्तु ,17 कार्तिक |

किसे चिन्ता है मुल्क़ की ? सत्ता पाने से पहले चिन्तित दिखने वाले, सत्ता पाते ही खुनचुसवा ( ख़ून चूसने वाले ) हो गए।
जहाँ अधिकार के लिए नहीं,  वरन् सत्ता प्राप्ति के लिए संघर्ष होता है; उस मुल्क़ का मालिक ख़ुदा होता है। नेपाल ! बुद्ध भूमि नेपाल; एक ऐसा ही मुल्क़ है; जो बक़्सा न गया किसीके भी द्वारा। बिमारी है तो उपचार  भी है, परन्तु यहाँ उपचार न हुआ; उस प्रणाली को ही विस्थापित कर दिया गया, जो बिमार हुआ।
निरंकुश राणा शासन के पराभव के पश्चात्, सबसे लम्बा शासन काल राजतन्त्र का रहा। जो अब नहीं है, और आज इस राजनैतिक उथल-पुथल के दौरान; एक बार फ़िर से राजसत्ता को स्थापित करने की कवायद करने वाले सक्रिय हो गए हैं। वास्तव में,  यदि कहा जाय तो यहाँ शासन तो बदला, पर शासक वही पुराने ही रहे। जो राजतन्त्र के दौरान पद पर थे, वही लोग घूम-फ़िर कर पद पर बने रहे। अर्थात नेपाल में, समूल राजनैतिक परिवर्तन कभी हुआ ही नहीं।

यह भी पढें   नेपाल–भारत के बीच व्यापार विषयक चर्चा कार्यक्रम आयोजित

oli-bachao

माओवाद का उदय, आमूल परिवर्तन के नाम पर हुआ; करीब बीस हजार लोग असमय काल के गाल में समा गए। अंत में पता चला, सब कुछ सत्ता पाने के लिए हुआ था। यहाँ के राजनेताओं में राजनैतिक इच्छाशक्ति का सर्वथा अभाव रहा है, कोई भी सकारात्मक निर्णय लेने में सक्षम दिखाई नहीं देता। यहाँ का बड़े से बड़ा ईमानदार नेता अपने आपको सत्ता-सुख से वंचित नहीं रख पाया; यही वज़ह है पद पाने के लोभ में देश को अंध-कूप में पहुँचा दिया।
आज राजनैतिक निकास पाने की आस में,  देश चौराहे पर खड़ा चारो ओर निहार रहा है; निराश, हताश, उदास और इस घड़ी में; किसी भी राजनेता के पास इसका स्थाई हल नहीं है।
विरोध की राजनीति, अति स्वच्छंदता नेपाल की राजनीति को पथभ्रष्ट कर रही है,
दिग्भ्रमित राजनेता समझ ही नहीं पा रहे, क्या करें, क्या न करें ? देश अनिश्चितता की गर्त में समाता जा रहा है।

यह भी पढें   सरकार की नीति तथा कार्यक्रम में स्पष्ट दृष्टिकोण का अभाव – प्रमेशकुमार हमाल

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *