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उल्लू’ मूर्खता का प्रतीक नहीं,

 

उल्लू के बारे में जो प्रचलित मान्यता है कि, ‘उल्लू‘ मूर्खता का प्रतीक है यह पूरी तरह से गलत है। उल्लू धन की देवी लक्ष्मी का वाहन है। और प्राचीन यूनानी कथाओं में इसे एक बुद्धिमान प्राणी बताया गया है।

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प्राचीन यूनान के धर्म ग्रंथों में उल्लेखित है कि बुद्धि की देवी, एथेन के बारे में कहा जाता है कि वह उल्लू का रूप रख पृथ्वी पर आई थीं।

भारतीय समाज में भले ही उल्लू को ‘अपशकुन’ के तौर पर देखा जाए। लेकिन तंत्रशास्त्र में तो उल्लू विशेष महत्व रखता है। प्राचीन काल में मौसम का हाल जानने के लिए भी उल्लुओं का उपयोग किया जाता था।

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हिन्दू मान्यताओं के अनुसार गौतम ऋषि ने तीर्थनगरी में उलूक तंत्र की संरचना की थी। उल्लू एक पक्षी है। यह किसी भी तरह से किसी के लिए भी अशुभ नहीं होता। महज यह अंधविश्वास सदियों से फैलाया जा रहा है कि उल्लू एक अनिष्ट पक्षी है।

पौराणिक मान्यताओं पर विस्तार से काला जादू करने वाले लोग इस रात को उल्लू की बलि देते हैं। वह मानते हैं कि ऐसा करने से धन की देवी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है, लेकिन सच ये नहीं है। इस तरह की किसी भी बलि से मां लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होती।

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उल्लू से जुड़ी कुछ प्रचलित मान्यताएं

# सुबह पूर्व दिशा में पेड़ पर बैठे उल्लू को देखने अथवा उसकी आवाज सुनने से धन की प्राप्ति होती है।

# यदि रात्रि के समय उल्लू चारपाई पर आकर बैठ जाए तो उस परिवार में शीघ्र ही किसी का विवाह होने वाला है।

# कोई गर्भवती महिला प्रसव के लिए जाते समय उल्लू देख ले तो उसे जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं।

# यदि उल्लू उड़ते समय किसी गंभीर रोगी को छूकर गुजर जाए तो इसका अर्थ है कि वह रोगी बहुत जल्द ठीक हो जाएगा।

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उल्लू से जुड़े अंधविश्वास

# उल्लू के साथ-साथ उसके पंजे, खोपड़ी, हड्डियां, पंख और मांस का तावीज भी बनाया जाता है।

# शकुन शास्त्र के अनुसार यदि उल्लू घर की छत पर बैठ कर बोलता है तो उस घर में किसी की भी असामयिक मृत्यु होती है।

# उल्लू का बांई ओर बोलना और दिखाई देना शुभ रहता है। दाहिने देखना और बोलना अशुभ होता है।

# यदि किसी के दरवाजे पर उल्लू तीन दिन तक लगातार रोता है, तो उसके घर में चोरी अथवा डकैती होने की संभावना अधिक रहती है।

जागरण से साभार

 

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