गुरु नानक देव जी के प्रमुख संदेश
इतिहास में कुछ लोग विरले ही जन्म लेते हैं जो अपने नाम को सार्थक करते हुए नई इबारत रचते हैं। गुरु नानक इन्हीं में से एक थे। उन्होंने विश्व भ्रमण कर लोगों को कुप्रथाओं, आडम्बर, भ्रम एवं अज्ञान से दूर रहने का मार्गदर्शन किया।
गुरु नानक चाहते थे कि लोग अपनी अंतरआत्मा को परमात्मा के साथ जोड़ सकें। हर जगह प्रेम और भाईचारा प्रसारित हो सके, मानव और उनका समाज स्वस्थ रह सकें।
गुरु नानक देव जी के प्रमुख संदेश
– स्त्री-जाति का आदर करना चाहिए। कभी किसी का हक नहीं छीनना चाहिए।
– यदि किसी को धन की अथवा कोई अन्य मदद चाहिए तो हमें पीछे नहीं हटना चाहिए।
– ईश्वर सर्वत्र विद्यमान है। हम सबका पिता वही है इसलिए सबके साथ प्रेम पूर्वक रहना चाहिए।
– अपने हाथों से मेहनत कीजिए, लोभ को त्याग दीजिए। न्यायोचित साधनों से धन का अर्जन करना चाहिए।
– माया (धन) को जेब में ही स्थान देना चाहिए, अपने हृदय में नहीं।
– अपनी कमाई का ‘दसवां भाग (1/10) परोकार के लिए एवं अपने समय का 1/10 प्रभु-सिमरन अथवा ईश्वर के लिए लगाना चाहिए।
– चिंता-मुक्त रहकर अपने कर्म करने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है ‘नानक चिंता मत करो, चिंता तिरस्कार के समान है।’
– संसार को जीतने से पहले स्वयं अपने विकारों पर विजय पाना अत्यावश्यक है।
– अहंकार मनुष्य को मनुष्य नहीं रहने देता। अतः अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। विनम्र हो सेवाभाव से जीवन गुजारना चाहिए।
– गुरु साहिब तो ज्ञान हैं, आलोक हैं, मार्गदर्शन हैं, माता-पिता हैं,परमेश्वर हैं और आज भी ‘श्री गुरु ग्रन्थसाहिब’ के रूप में हर-पल, हर-क्षण हमारे समीप हैं। ऐसे सद्गुरू को कोटि-कोटि प्रणाम।


