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बुद्ध की नजरों में स्त्री पुरुष समान हैं ।

 

बुद्ध हमेशा सादा जीवन उच्च विचार के बारे में जोर देते थे। वो अपने शिष्यों को भी इन्हीं विचारों को समाहित करने की सीख देते थे। सिद्धार्थ यानी गौतम बुद्ध का विवाह 16वर्ष की आयु में यशोधरा से हुआ था। उनका एक पुत्र था, जिसका नाम राहुल था।

गौतम बुद्ध ने कहा है, ‘जो मनुष्य दुख से पीड़ित है, उनके पास बहुत सारा हिस्सा ऐसे दुखों का है, जिन्हें मनुष्य ने अपने अज्ञान, ग़लत ज्ञान या मिथ्या दृष्टियों से पैदा कर लिया हैं उन दुखों का निराकरण सही ज्ञान द्वारा ही किया जा सकता है।’

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गौतम बुद्ध स्वयं कहीं प्रतिबद्ध नहीं हुए और न ही अपने शिष्यों को उन्होंने कहीं बांधा। उन्होंने कहा है, ‘मेरी बात को इसलिए चुपचाप न मानो उसे मैंने यानी बुद्ध ने कहा है। उस पर भी सन्देह करो और विविध परीक्षाओं द्वारा उसकी परीक्षा करो।’budha-in-thai.png11

भगवान बुद्ध ने किस भाषा में उपदेश दिए, इस बात की प्रामाणिक सामग्री का अभाव है, फिर भी इतना निश्चित है कि उनके उपदेशों की भाषा कोई लोकभाषा ही थी। इसके अनेक कारण हैं। पहला यह कि वह अपना सन्देश जन-जन तक पहुंचाना चाहते थे, न कि विशिष्ट जनों तक ही।

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इसके लिए आवश्यक था कि वे जनभाषा में ही उपदेश देते। दूसरा यह कि भाषा विशेष की पवित्रता पर उनका विश्वास न था। वे यह नहीं मानते थे कि शुद्ध भाषा के उच्चारण से पुण्य होता है।

भगवान बुद्ध के अनुसार धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में सभी स्त्री एवं पुरुषों में समान योग्यता एवं अधिकार हैं। इतना ही नहीं, शिक्षा, चिकित्सा और आजीविका के क्षेत्र में भी वे समानता के पक्षधर थे।

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