वर्षा और समृद्धि के देवता रातो मच्छिन्द्रनाथ का रथ जावलाखेल पहुँचा, 6 असार को होगा भोटो दर्शन
वर्षा और समृद्धि के देवता रातो मच्छिन्द्रनाथ के रथ को लगनखेल के ठटी टोल से खींचकर बुधवार को जावलाखेल पहुँचाया गया।
वैशाख शुक्ल प्रतिपदा से शुरू हुई रथयात्रा के दौरान रथ लगनखेल के ठटी टोल में रुका हुआ था। शुभ मुहूर्त के अनुसार इसे आगे बढ़ाकर जावलाखेल लाया गया।
परंपरा के अनुसार रथ के जावलाखेल पहुँचने के चार दिन बाद राष्ट्र प्रमुख की उपस्थिति में भोटो जात्रा (भोटो दर्शन) आयोजित की जाती है। इसी क्रम में इस वर्ष असार 6 (शनिवार) को भोटो दिखाने का कार्यक्रम तय किया गया है।
रातो मच्छिन्द्रनाथ की यह ऐतिहासिक रथयात्रा पुल्चोक से प्रारंभ होती है और गाःबाहल, मंगलबजार, सुन्धारा, लगनखेल तथा इटिटोल होते हुए जावलाखेल पहुँचती है। यहीं पर भोटो दर्शन का विशेष आयोजन किया जाता है।
भोटो दर्शन के बाद मच्छिन्द्रनाथ की प्रतिमा को एक छोटे खट (पालकी) में स्थापित कर बुंगमती ले जाया जाता है, जिसके साथ इस वर्ष की जात्रा (यात्रा) का समापन हो जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नेपाल में लगातार 12 वर्षों तक पड़े भीषण अकाल और सूखे को समाप्त करने के लिए तत्कालीन राजा नरेन्द्र देव ने इस जात्रा की शुरुआत कराई थी। तब से यह पर्व नेपाल की सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं में से एक माना जाता है।
रातो मच्छिन्द्रनाथ की रथयात्रा नेपाल की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें हजारों श्रद्धालु और पर्यटक हर वर्ष भाग लेते हैं।


