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शराव, मांस व अंड़े की बढ़ी मांग

 

काठमांडू,१० दिसिम्बर |
काठमांड़ू के हर मोहल्लों, मुख्य बाजारों के रेष्टुरेन्ट, क्याफे व छोटी–छोटी दुकानों में दोपहर से शाम ९ बजे तक खाने–पीने वालों का मजमा देखने को मिलता है । ठंड़ के मौसम में बफ, चिकेन, मटन व पोर्क के मांस अधिक खाते हैं । इसी प्रकार अधिकांश शराबखोर इस मौसम में रोयल स्टैग व रुस्लान वोड़्का ही पीते हैं । ताहाचल, ड़ल्लू स्थित एलिना नास्ता घर की संचालिका एलिना लामा कहती हैं कि इस मौसम में रुस्लान वोड़का व रोयल स्टैग की विक्री अधिक होती है । इनके अतिरिक्त ‘तोङवा’ की भी बिक्री अधिक होती है ।
इसी प्रकार शाम के वक्त कच्चे मांस की दुकानों में भी लंबी कतार देखने को मिलती है । हालांकि मांग बढ़्ने के बाद भी मूल्य स्थिर है ।
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जाड़े का असर अंड़े की दुकानों तक भी आ पहुंचा है । लोगों की भीड़ देर शाम तक भी इन दुकानों पर देखी जा सकती है । व्यॉल, पोच, आम्लेट के साथ कच्चे अंड़े की मांग भी बढ़ गई है । हालांकि मांग बढ़ने के बाद भी मूल्य स्थिर है ।
ध्यातव्य है कि मांसाहारी लोग चिकेन के मांस को ‘नसीब अपना–अपना’, मटन के मांस को ‘कभी–कभी’, पोर्क के मांस को ‘दिल है मानता नहीं’, बफ के मांस को ‘लावारिस’, मछली को ‘पूmल और कांटे’ एवं अंड़ा को ‘रेगुलर’ जैसे सांकेतिक शब्दों द्वारा संबोधित करते हैं । वैसे तो जाड़े का मौसम बेहद खुशगवार होता है । खाने–पीने से लेकर परिधानों तक के लिए इस पसंद किया जाता है । मगर स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह मौसम संवेदनशील भी है । कालिमाटी स्थित मिश्रा फार्मेसी के संचालक व हेल्थ असिस्टेन्ट प्रमोद मिश्रा कहते हैं कि जाड़े के मौसम में उच्च रक्तचाप व मधुमेह के मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरुरत है । हृदय के तकलीफों व ब्रेन स्ट्रोक की संभावनाएं बढ़ जाती है ।

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